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गुर्दे के कैंसर के मरीजों के बचने की कितनी उम्मीद होती है?

गुर्दे का कैंसर क्या होता है?

प्रत्येक व्यक्ति को पेट के निचले हिस्से में पीछे की ओर स्थित गुर्दे का एक जोड़ा मिला हुआ है। गुर्दे पोषक तत्वों को निकलकर रक्त को शुद्ध करता है और मूत्र का निर्वहन करता है।

अन्य सभी कैंसर की तरह, जब स्वस्थ गुर्दे की कोशिकाएं असामान्य रूप से व्यवहार करना शुरू कर देती हैं और अनुपात से बाहर हो जाती हैं, तो ट्यूमर बनने लगता है, जिसे गुर्दे के कैंसर के रूप में जाना जाता है। चूँकि गुर्दा एक खुद एक सीमित अंग होता है, इसलिए इसका मेटास्टेसिस होने के पहले और आसपास के अंगों तक पहुँचने से पहले इसके कैंसर का पता जल्दी चल जाता है।

गुर्दे के कैंसर के कारण क्या होते हैं?

अन्य कैंसर के समान इसका कारण भी अज्ञात होता है, लेकिन कुछ जोखिम कारक निम्न होते हैं:

  • ध्रूमपान
  • पुरुषों में गुर्दे के कैंसर होने की संभावना महिलाओं से दोगुनी होती है।
  • अतिरिक्त वजन से हार्मोनल परिवर्तन हो सकते हैं जो कैंसर के खतरे को बढ़ाते हैं।
  • लंबे समय तक कुछ दर्द की दवाएं लेने से।
  • गुर्दे की उन्नत बीमारी होने से या लंबे समय तक डायलिसिस होने पर
  • कुछ अनुवांशिक स्थितियां, जैसे वॉन हिप्पेल-लिंडौ (VHL) बीमारी या विरासत में मिली पैपिलरी रीनल सेल कार्सिनोमा
  • विशेष रूप से भाई-बहनों में गुर्दे के कैंसर का पारिवारिक इतिहास।
  • कुछ रसायनों के ज्यादा संपर्क में रहने से जैसे एस्बेस्टस, कैडमियम, बेंजीन, कार्बनिक सॉल्वैंट्स, इत्यादि
  • उच्च रक्तचाप होने से
  • काले लोगों में। गोरों की तुलना में काले लोगों को ज्यादा खतरा होता है।
  • लिंफोमा होने से

गुर्दे के कैंसर का पता कैसे चलता है?

  • पेशाब में खून आना
  • पेट में कोई गांठ
  • भूख कम लगना
  • पेट के भीतर दर्द जो दूर नहीं होता है
  • वजन में कमी जो किसी अज्ञात कारण से होती है
  • बुखार जो सर्दी या अन्य संक्रमण के कारण नहीं होता है
  • अत्यधिक थकान
  • रक्ताल्पता
  • आपके टखनों या पैरों में सूजन

शारीरिक परिक्षण, मूत्र परीक्षण, रक्त परीक्षण, इंट्रावेनस पाइलोग्राम, यूएसजी, सीटी, एमआरआई और रीनल आर्टेरियोग्राम जैसे जो भी आवश्यक परिक्षण हैं, उनका परिणाम जानने के बाद उसी अनुसार उपचार किया जाता है।

अब हम अपने वास्तविक सवाल पर आते हैं, गुर्दे के कैंसर के मरीजों के बचने की कितनी उम्मीद होती है?

एक गुर्दा रोगी के जीवित रहने की दर इस बात पर निर्भर करती है कि कैंसर की पहचान किस अवस्था में होती है। इसमें शामिल हैं:

  • ट्यूमर का आकार (टी)
  • मेटास्टेसिस या दूसरे अंगों तक कितना फैला है
  • हड्डियों, मस्तिष्क, फेफड़े और लिम्फ नोड्स (एन) जैसे दूर के अंगों तक फैला है या नहीं।

अमेरिकन कैंसर सोसायटी के अनुसार, टी, एन, और एम के बाद संख्या या अक्षर इनमें से प्रत्येक कारक के बारे में अधिक विवरण प्रदान करते हैं। अधिक संख्या का मतलब है कि कैंसर अधिक उन्नत है। एक बार एक व्यक्ति की टी, एन, और एम श्रेणियां निर्धारित हो जाती हैं, आमतौर पर, सर्जरी के बाद, तो इस जानकारी को एक चरण प्रक्रिया में संयोजित किया जाता है, जिसे एक समग्र चरण आवंटित करने के लिए स्टेज ग्रुपिंग कहा जाता है।

सबसे शुरुआती चरण के कैंसर को चरण जीरो (सीमित) कहा जाता है, और फिर चरण I (1) से लेकर IV (4) तक,  जिसमें 1 सबसे कम और 4 सबसे उन्नत कैंसर होने की संभावना को कहा जाता है। कैंसर के कुछ चरणों को ए, बी, और सी अक्षर के साथ उप-चरण में बांटा जाता हैं। अक्षर एक्स का अर्थ है “मूल्यांकन नहीं किया जा सकता क्योंकि जानकारी उपलब्ध नहीं है।” यहां बड़ी संख्या होने का मतलब होता है कि कैंसर बहुत ज्यादा फैल गया है।

इसके चरण के अलावा कुछ अन्य कारक भी गुर्दे के कैंसर रोगियों के जीने की दर को दर्शाते हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • रक्त लैक्टेट डिहाइड्रोजनेज (LDH) का उच्च स्तर
  • ब्लड कैल्शियम का उच्च स्तर
  • रक्ताल्पता
  • 2 या अधिक स्थानों पर कैंसर का फैल जाना
  • यदि रोगी का निदान एक वर्ष के समय के पहले होता है, जब मरीज को प्रणालीगत उपचार (लक्षित चिकित्सा, इम्यूनोथेरेपी, या कीमोथेरेपी) की आवश्यकता होती है।
  • जा मरीज को सामान्य दैनिक गतिविधियों को करने में कठिनाई होने लगती है

उपर्युक्त कारकों का अस्तित्व जितना अधिक होता है उतना ही यह जीने की दर को खराब करता है। आमतौर पर जब से कैंसर का पता चलता है, जीवित रहने की दर 5 साल होती है।

उसी उम्र की सामान्य आबादी की तुलना में गुर्दे के कैंसर के लिए जीवित रहने की दर 5 साल की है:

स्टेज 5 साल की जीने की दर
स्थानीय 93%
क्षेत्रीय 69%
दूर-दराज के 12%
सब मिलाकर 75%

उपरोक्त दरों से पता चलता है कि इस क्षेत्र में तकनीकी प्रगति के साथ, गुर्दे के कैंसर का लगभग सभी चरणों में सौ प्रतिशत इलाज किया जा सकता है। सर्जरी, क्राय थेरेपी, रेडियोफ्रीक्वेंसी एब्लेशन, धमनी एम्बोलिज्म, बायोलॉजिक थेरेपी, टारगेटेड थेरेपी, रेडिएशन और कीमोथेरेपी हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि मरीज बच जाय। गुर्दे के कैंसर का पता लगाने के लिए शुरुआती संकेतों को पहचानना महत्वपूर्ण है, जो इसके फैलाव को रोकने और जीवित रहने की दर में सुधार करने के लिए जरुरी है। लेखक सिर्फ यह परिभाषित करने की कोशिश करता है कि ना सिर्फ जीवित रहने की दर को देखना है बल्कि कैंसर का जल्दी पता लगाना और बाकी उपायों को करना भी बहुत जरुरी है।

डॉ. सुदीप सिंह सचदेव, सलाहकार – नेफ्रोलॉजी, किडनी प्रत्यारोपण – वयस्क | नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, गुरुग्राम

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