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गर्भावस्था के दौरान यात्रा करना – क्या करें क्या ना करें

एक बहुत ही सामान्य प्रश्न जो मुझसे अपने प्रसवपूर्व मरीजों द्वारा पूछा जाता है कि गर्भावस्था में यात्रा कितना सुरक्षित है। जब आप गर्भवती होती हैं तो आमतौर पर यात्रा करना सुरक्षित होता है। सार्वभौमिक सावधानियों में शामिल हैं कि भारी काम करने से बचें, भाग भाग कर काम करने के बजाय धीरे-धीरे काम करें और बीच-बीच में आराम करें, ढीले-ढाले कपड़े पहनें, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लें और नियमित अंतराल पर टहलें। हमेशा अपने गर्भावस्था के अस्पताल के दस्तावेजों को साथ ले जाएं, अपनी नियत तारीखों को याद रखें, सैनिटरी नैपकिन ले जाएं, ओवर-द-काउंटर दवाएं जैसे दर्द निवारक दवाएं, उल्टी रोकने वाली दवाएं और चिकित्सकों द्वारा निर्धारित दवाएं  लें। यदि विदेश में छुट्टी पर जा रहे हैं, तो हमेशा यात्रा बीमा खरीदें और बताए गए टीके लें।

वायुमार्ग यात्रा

जब तक आप और आपका बच्चा ठीक है तब तक गर्भावस्था के 36 सप्ताह तक हवाई यात्रा सुरक्षित रहती है। सभी एयरलाइंस 28 सप्ताह की गर्भावस्था तक यात्रा करने की अनुमति देती है और कई 34-36 सप्ताह तक की अनुमति देते हैं। इसलिए यदि आप अपनी गर्भावस्था के अंतिम तीसरे तिमाही में हैं तो टिकट लेने से पहले एयरलाइंस से पूछताछ करें। 36 सप्ताह के बाद हवाई यात्रा की सिफारिश नहीं की जाती है। प्रीक्लेम्पसिया प्लेसेंटा प्रीविया/लो लेट प्लेसेंटा जैसी कुछ स्थितियों में हवाई यात्रा न करने की भी सिफारिश की जाती है यदि आप 1 से अधिक भ्रूण (जुड़वां या ट्रिपल गर्भावस्था) धारण कर रहे हैं या यदि आप प्रसव के समीप हैं। दुनिया में उन क्षेत्रों की यात्रा करना जहाँ ज़ीका वायरस के प्रकोप की सूचना दी गई है, यदि आप गर्भवती हैं तो इसकी सिफारिश नहीं की जाती है।

हवाई जहाज के अंदर हर 30 मिनट में एक बार अपनी सीट से बाहर निकलें और गलियारे में चलें। अपने लिए एक गलियारे वाला सीट चुनें क्योंकि इससे आपको अपने पैरों को सीधा करने और आसानी से अंदर और बाहर जाने में मदद मिलेगी। हमेशा सीट बेल्ट पहनें। अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीएं।

ट्रेन से यात्रा

यह 36 सप्ताह तक सुरक्षित माना जाता है। ट्रेन में यात्रा करते समय ऊपर बताई गई सार्वभौमिक सावधानियां लागू होंगी। स्लीपर कोच में मध्य या उपरी जगह के बजाय अपने लिए नीचे वाला जगह चुनें। शहर के भीतर स्थानीय ट्रेनों से यात्रा करते समय अत्यधिक भीड़भाड़ वाले समय और जब अत्यधिक भीड़ हों, तो इस दौरान यात्रा करने से बचने की कोशिश करें। महिलाओं के लिए निर्धारित जगह का दावा करें।

कार से यात्रा

यहाँ तक की आप पिछली सीट पर हों तो भी बिना सीट बेल्ट पहनें यात्रा ना करें। अपने पेट के नीचे अपने कूल्हे की हड्डियों पर बेल्ट को बांधें। ऊपरी कंधे का पट्टा छाती के केंद्र (आपके स्तनों के बीच) के माध्यम से आपके पेट के ऊपर जाना चाहिए। यदि आप एक लंबी यात्रा पर हैं तो बार-बार रुकें जहां आप कार से बाहर निकलने में सक्षम हैं और अपने पैरों को फैलाने और थोड़ा सा घूमने में सक्षम हैं। खुद को हमेशा हाइड्रेटेड रखें।

मोटरसाईकिल/स्कूटर द्वारा यात्रा (राइडिंग पिलियन)

जब आप गर्भवती हों तो यह परिवहन का एक आदर्श तरीका नहीं है। रोगी को उच्चरक्तदाब/चक्कर और संतुलन बनाने में कठिनाई हो सकती है, वे मोटर साइकिल/बाइक यात्रा करने से गिर सकते हैं लेकिन कभी-कभी यह अपरिहार्य हो सकता है, खासकर भारत जैसे देश में। सुनिश्चित करें कि आप सीट के दोनों तरफ पैरों को रख कर बैठते हैं इससे झटका या टक्कर जैसे मामले में आपके गिरने की संभावना कम हों जाती है। साड़ी पहनने से बचें और दुपट्टा न लें। अपने थैले में अपनी चुन्नी या दुपट्टे को दूर रखें क्योंकि वे पहिये में उलझ सकते हैं और गिरने की स्थिति में गला घुटने का कारण बन सकता हैं। धीरे-धीरे यात्रा करें और यथासंभव सुरक्षित रहते हुए गड्ढों से बचें। ऊँचे उठे जगहों और गति नियंत्रकों पर धीरे से चलें। सवारी करते समय यातायात नियमों का पालन करें। प्रत्येक मोड़ से पहले उचित संकेतक दें। तेज चलाने से बचें। आरातिरछा चलाने से बचें।

रिक्शा/ऑटोरिक्शा/ ई रिक्शा द्वारा यात्रा

ये भारत में सार्वजनिक परिवहन के सामान्य तरीके हैं। इनमें आमतौर पर कोई सीट बेल्ट या कोई सुरक्षा विशेषताएं नहीं होती हैं। इसके अलावा निर्मित सामग्री कमजोर होते हैं। इसके अलावा चालक काफी लापरवाह होते हैं और तेजी में चलाते हैं। इसलिए सबसे अच्छा है कि बचना, लेकिन फिर से कभी कभी उपयोग करना अत्यावश्यक हो सकता है। उस मामले में सबसे सुरक्षित बात यह है कि आप चालक को सूचित करें कि आप गर्भवती हैं और इसलिए यातायात के नियमों का पालन करते हुए धीरे और सुरक्षित चलाए।

डॉ मंजुला एच एम | सलाहकार – प्रसूति एवं स्त्री रोग, नारायणा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, एचएसआर लेआउट, बैंगलोर

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