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आघात – क्या यह अनुमान लगाए जाने और रोके जाने योग्य है?

क्या आघात की भविष्यवाणी की जा सकती है? नए अध्ययन से संकेत मिलता है कि इसका उत्तर सकारात्मक है। यह एक हाँ है! आइए विवरण देखें और इसे आगे समझें।

आप अपनी उम्र या पारिवारिक इतिहास के बावजूद अपने आप को आघात के हमले से बचा सकते हैं। यहाँ सात निवारक उपाय हैं जिनसे आप आघात को रोकने का विकल्प चुन सकते हैं।

  • अपने रक्तचाप को नियंत्रित करें: उच्च रक्तचाप आघात का संभावित जोखिम कारक है। आप रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में निम्नलिखित बदलाव का पालन कर सकते हैं:
  • नमक का सेवन कम करें
  • उच्च कोलेस्ट्रॉल वाले खाद्य पदार्थ जैसे बर्गर, आइसक्रीम आदि से बचें
  • धूम्रपान छोड़ें
  • अपने आहार में अधिक फल और सब्जियां शामिल करें
  • नियमित रूप से व्यायाम करें
  • वजन कम करें: मोटापा या अधिक वजन आपके आघात आने की संभावना बढ़ा देता है। अपने कैलोरी सेवन को कम रखें और एक तय की गई व्यायाम की दिनचर्या का पालन कर एक स्वस्थ वजन को बनाए रख सकते हैं।
  • व्यायाम: कम से कम 30 मिनट का व्यायाम सुनिश्चित करें – 1 घंटा का दैनिक व्यायाम आपकी दिनचर्या में शामिल किया जाता है। आप पैदल चलना, टहलना, दौड़ना, खेल गतिविधि या तंदरुस्त रहने के कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। व्यायाम शुरू करने से पहले एक चिकित्सक से परामर्श करना उचित है जो आपको अपने शारीरिक तंदरुस्ती के आधार पर आपको व्यायाम के बारे में सलाह दे सकता है।
  • अत्यधिक शराब को ना कहें: बहुत अधिक शराब का सेवन उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मोटापा, यकृत की क्षति जैसी कई स्थितियों में योगदान कर सकता है और ये सभी आघात के जोखिम कारक हैं। इसलिए शराब पीने से बचना बेहद उचित है।
  • अनियमित दिल की धड़कन का इलाज करवाएँ: यदि आपके दिल की धड़कन अनियमित है तो इसका इलाज करवाएं। अनियमित दिल की धड़कन होने से आघात का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि इससे हृदय में रक्त के थक्के बन सकते हैं और यदि मस्तिष्क में ये थक्के बनते हैं तो इससे मस्तिष्क का आघात हो सकता है।
  • मधुमेह को नियंत्रण में रखें: मधुमेह आघात का एक प्रमुख जोखिम कारक है। इसलिए इसे नियंत्रण में रखना और एक स्वस्थ जीवन शैली को बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
  • आघात के प्रति सचेत रहें: आघात की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मरीज को बिना समय गंवाए अस्पताल ले जाना चाहिए। एफ.ए.एस.ट. को ध्यान में रखकर आघात को आसानी से पहचानने में मदद मिल सकती है और इस प्रकार रोगियों को आपातकालीन उपचार दिया जा सकता है।

एफ.ए.एस.टी. से तात्पर्य है:

एफ – चेहरे का गिरना, विशेषकर जब कोई मुस्कुराए

ए  – हाथ की कमजोरी

एस – बोलने में कठिनाई

टी – कार्य करने का समय

जबकि आघात अनुमान लगाए जाने और रोके जाने योग्य दोनों होते है, हमारे द्वारा लिये जाने वाले कदम से इस बात पर फर्क पड़ता है की हम आघात से खुद को कितना सुरक्षित रख सकते हैं। स्वस्थ खाने से लेकर नियमित रूप से व्यायाम करने जैसे असंख्य तरीके हैं जिनसे हम आघात को दूर रख सकते हैं।

जबकि आघात की भविष्यवाणी करने का तरीका वास्तव में एक क्रांतिकारी खोज है, यह जरुरी नहीं कि यह आपके सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में अभी तक पहुंच गया हो। इसलिए रोकथाम पर ध्यान देना बेहतर है। तरीकों का पालन करके, जो ऊपर पहले उल्लेखित किया गया है, आघात को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।

याद रखें, आघात को अक्सर विशेषज्ञों द्वारा एक जीवन शैली से संबंधित बीमारी के रूप में करार दिया जाता है।

जीवनशैली में बदलाव लाकर हम जीवन में आघात आने की चिंता किए बिना स्वतंत्र जी सकते हैं!

डॉ हरीश ए एच, सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट, सह्याद्री नारायणा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, शिमोगा

Narayana Health

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