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हृदय में छेद या निलयी (हृदय के अंदर स्थित गुहा) पट दोष

जन्मजात हृदय दोष (हृदय के जन्म दोष) का वैश्विक प्रसार बढ़ रहा है। सभी जीवित बच्चों में जन्मजात हृदय दोष (सीएचडीएस) का मामला वर्ष में लगभग 1% तक होता है जो न केवल स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच बल्कि आम लोगों के बीच भी चर्चा का एक आवश्यक विषय है। यहां कुछ प्रासंगिक जानकारी दी गई है जो आपको हृदय के सबसे सामान्य जन्म दोषों में से एक के बारे में बताता है, जिसके बारे में आपको जानना चाहिए ।

निलयी पट दोष (वीएसडी) या हृदय में छेद होना किसे कहते हैं?

हृदय में छेद या निलयी पट दोष मांसपेशी की दीवार (पट) में होता है जो हृदय के निचले कक्षाओं को अलग करता है, जिसे निलय के रूप में जाना जाता है। एक स्वस्थ मानव हृदय में, ऑक्सीजन युक्त रक्त बाएं आलिंद (ऊपरी हृदय कक्ष) से ​​बाएं निलय में बहता है, जहां से यह शरीर के अंगों में फैलता है। ऑक्सीजन की कमी वाला रक्त दायाँ आलिंद में बहता है और ऑक्सीजन के लिए फेफड़े की ओर दाएं निलय से गुजरता है।

निलयी पट दोष इस प्रणाली को वैकल्पिक मार्ग (बाइपास) प्रदान करता है और ऑक्सीजन से भरे रक्त को बाएं से दाएं निलय में असामान्य रूप से प्रवाह करने का कारण बनता है, बदले में फेफड़ों में बहुत अधिक रक्त खींचने का काम करता है।

निलयी पट दोष (वीएसडी) से सबसे अधिक कौन प्रभावित होता है: शिशु या वयस्क?

वयस्कों में निलयी पट दोष(वीएसडी):

निलयी पटदोष(वीएसडी) के मामले वयस्कों में अपेक्षाकृत दुर्लभ, अधिक गंभीर और संभावित रूप से घातक होते हैं। सबसे सामान्य कारण हृदय की मांसपेशियों का नुकसान होना है जो एक गंभीर ह्रदयघात के बाद हृदय में छेद का कारण बनता है। ह्रदय की शल्यचिकित्सा और ह्रदय को आघात होने के अन्य कारण हैं। इस तरह के दोष को प्रायः सुधारक शल्यचिकित्सा की आवश्यकता होती है।

शिशुओं में निलयी पट दोष(वीएसडी):

शिशुओं में निलयी पट दोष(वीएसडी) एक जन्मजात असामान्यता है (जिसके साथ बच्चा पैदा हुआ है) और यह गर्भावस्था के दौरान असामान्य अंग विकास के कारण होता है। निलयी पट दोष (वीएसडी) के विभिन्न आकार और प्रकार हैं जिनके संभावित रूप से घातक होने का कोई न्यूनतम परिणाम नही है। वे बच्चे जो निलयी पट दोष (वीएसडी) के साथ पैदा हुए हैं और जिन्हें हृदय से जुड़ी अन्य बीमारी हैं वे बहुत अधिक नाजुक होते हैं और उन्हें संशोधक शल्यचिकित्सा की आवश्यकता होती है। छोटे निलयी पट दोष (वीएसडी) के साथ और पृथक जाँच के बाद नवजात शिशुओं का आमतौर पर बेहतर परिणाम होता है। उनमें से कई सामान्य जीवन जीते हैं, बिना किसी समस्या का एहसास किये हुए और जब बच्चे कुछ असंबंधित समस्या के लिए चिकित्सक से मिलते हैं तब निलयी पट दोष (वीएसडी) का सामान्यतः पता चलता है।

ह्रदय में छेद के लक्षण:

छोटे वीएसडी वाले अधिकांश बच्चों में कोई लक्षण का पता नहीं चलता है । हालांकि बड़ी विसंगतियाँ और अन्य ह्रदय की समस्याओं वाले बच्चों में इस लक्षण का पता जल्दी ही चल जाता है । बच्चा निम्नलिखित लक्षणों को प्रदर्शित कर सकता है:

  • सांस लेने में तकलीफ: सांस लेने में कमी, तेजी से सांस लेना
  • पीली त्वचा और होंठ और नाखूनों के पास नीले रंग का दिखना
  • बारम्बार होने वाला श्वसन संक्रमण
  • वजन बढ़ने में दिक्कत
  • भोजन करते समय पसीना आना
  • तेज हृदय गति
  • लगातार खाने में असमर्थ
  • वजन बढ़ाने में असफल
  • बच्चे की त्वचा का रंग नीला होना
  • अत्यधिक रोना

ह्रदय में छेद के कारण:

यह माना जाता है कि भ्रूण के विकास के शुरुआती चरणों के दौरान निलयी पट दोष विकसित होता है। वीएसडी का कोई निश्चित कारण नहीं है। हृदय के प्रारंभिक विकास चरण के दौरान, कक्षाओं के बीच कोई पट नहीं होता है। जैसे ही भ्रूण बढ़ता है, एक मांश पेशी की दीवार बनने लगती है, जो परिकोष्ठ को निलय से अलग करती है।

ह्रदय में एक छेद तब होता है जब मांशपेशी की दीवार दो निलय के बीच पूरी तरह से बनने में विफल हो जाती है, जिसके परिणामस्वरूप ये कक्षाएं एक दूसरे से असामान्य रूप से परस्पर क्रिया करते हैं। इसके फलस्वरूप, ह्रदय में छेद ऑक्सीजन युक्त रक्त को ऑक्सीजन रहित रक्त के साथ मिलाने का कारण बनता है, जिससे रक्त को फेफड़ों तक भेजा जाता है और बदले में फेफड़ों और अन्य संबंधित समस्याओं में दबाव बढ़ जाता है। आलिंद पट में भी समान दोष हो सकते हैं जो आलिंद पट(एएसडी) को जन्म देते हैं।

चेतावनी संकेत जब चिकित्सक से परामर्श लेने की जरुरत है :

आप यह कैसे तय करेंगे की आपको चिकित्सक से परामर्श करने की जरुरत है?

शिशुओं में:

  1. खाना खाते, खेलते या रोते समय तेजी से सांस लेता है
  2. खेलते समय जल्दी थक जाता है
  3. वजन बढ़ने में मुश्किलों का सामना करता है
  4. बार-बार श्वसन संक्रमण हो जाता है

वयस्कों में:

  1. शारीरिक गतिविधियों के बाद और जब आप लेटते हैं तब सांस की कमी होती है
  2. अत्यधिक थकान
  3. अनियमित और तेजी से दिल का धड़कना

निलयी पट दोष के जोखिम और जटिलताओं को समझना:

इस जन्मजात विसंगति के दुष्परिणाम के रूप में, निलयी पट दोष के रोगियों को घातक जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है:

ह्रदय में एक बड़े छेद के साथ, शरीर को पर्याप्त रक्त पंप करने के लिए अंग को अत्यधिक दबाव का सामना करना पड़ता है। नतीजतन, इसे तेजी से और कठिन काम करना पड़ता है जिससे समय के साथ इसकी मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। प्रारंभिक हृदय छिद्र बंद होने (ऑपरेशन या उपकरण द्वारा) की कमी से हृदय की गति रुक सकती है।

  • फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप:

फुफ्फुसीय धमनी हृदय से फेफड़ों तक ऑक्सीजन के लिए रक्त पहुंचाती है। हृदय में छेद की वजह से यह धमनी रक्त की बढ़ी हुई मात्रा में ले जाता है जिसके परिणामस्वरूप उच्च रक्तचाप होता है जो फुफ्फुसीय उच्च रक्तचाप का कारण बनता है। यह अत्यधिक तनाव भी फुफ्फुसीय धमनी को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकता है।

  • ह्रदय की अंदरूनी परत का संक्रमण (एंडोकार्डिटिस):

छोटे वीएसडी वाले मरीजों को हृदय की संक्रमण की एक असामान्य जटिलता का सामना करना पड़ सकता है जिसे ह्रदय की अंदरूनी परत का संक्रमण कहा जाता है। यह तब होता है जब शरीर के अन्य हिस्सों से सूक्ष्म जीव रक्तप्रवाह से फैलते हैं और क्षतिग्रस्त हृदय के ऊतकों से जुड़ जाते हैं।

ह्रदय में छेद का इलाज: क्या वीएसडी के लिए शल्यचिकित्सा अनिवार्य है?

वीएसडी वाले हर मरीज को शल्यचिकित्सा की जरूरत नहीं होती है। अधिकांशतः 18 महीने के भीतर छोटे निलयी पट स्वाभाविक रूप से बंद हो जाते हैं या वे निलय के बीच रक्त के अत्यधिक मिलने नहीं देते हैं।

ह्रदय में छेद को बंद करने के लिए एक यंत्र (वीएसडीअवरोधीयंत्र) के उपयोग द्वारा एक न्यूनतम हानि रहित/अवांछनीय प्रक्रिया के माध्यम से बड़ी हृदय शल्य चिकित्सा के बिना ह्रदय में छेद का उपचार संभव है। हालांकि, यह प्रक्रिया सभी रोगियों पर लागू नहीं होती है और हृदयरोग विशेषज्ञ/शल्यचिकित्सक यह तय करेगा कि कौन सा रोगी इस न्यूनतम हानि वाले प्रक्रिया के लिए उपयुक्त है।

वीएसडी का उपचार: इसकी जटिलताएं?

कोई भी हृदय प्रक्रिया या चीर-फाड़ संभावित रूप से जटिलताओं से जुड़ा हो सकता है। उनमें से कुछ मामूली और कुछ बड़े हो सकते हैं। आपका चिकित्सक प्रस्तावित उपचार के लाभ-हानि और आप पर क्या सही रहेगा उस पर चर्चा करेगा। अंततः यह जोखिम-लाभ अनुपात होगा जो किसी भी उपचार की सफलता और स्वीकृति को निर्धारित करेगा।

रोकथाम और सावधानियां

जन्म विकृति होने के कारण वीएसडी को प्रथम चरण पर रोकना असंभव है। एक स्वस्थ गर्भावस्था और प्रसवपूर्व प्रारंभिक देखभाल निर्णायक एहतियाती कदम साबित हो सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान रेडियोलॉजी इमेजिंग सुविधा (अल्ट्रासाउंड) की वर्तमान स्थिति हृदय के कुछ बड़े और गंभीर जन्म दोषों का पता लगाने के लिए अच्छी तरह से सुसज्जित है। गर्भवती महिला की देखभाल के स्तर और प्रकार को निर्धारित करने के लिए परिवार और चिकित्सक अपेक्षाकृत बेहतर अवस्था में होंगे। इन रोगियों की देखभाल के लिए हृदय रोग विशेषज्ञ की देखरेख में होना अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ये संभावित रूप से जीवन बदलने वाले परिणाम होते हैं जिन्हें उचित रूप से प्रबंधित करने की आवश्यकता है। उपचार को व्यक्ति विशेष के लिए बनाना होगा और दीर्घकालिक देखभाल और योजना सुरक्षित, बेहतर और स्वस्थ जीवन के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ प्रवीण फनेंद्रनाथ सदर्मिन | सलाहकार – हृदयरोग विशेषज्ञ (वयस्क) | सेंट मार्था  ह्रदय केंद्र, संपांगी रामा नगर, बैंगलोर

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