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उसके स्तन: उसका निर्णय!!

यह एक सामान्य दिन था। सूरज हमेशा की तरह चमक उठा था। मैं अपने सामान्य समय पर अपने कोयल पक्षी के अलार्म की आवाज़ से अलसायी हुई जाग गई थी। रंग-बिरंगे गुलमोहर के पेड़ों पर पक्षी चहक रहे थे। मैं एफएम पर प्रसारित हो रहे संगीत को गुनगुनाते हुए अपने घर के कामों को करने में व्यस्त थी।

और फिर … शॉवर के नीचे, मैंने अपने बाएं स्तन में अपनी हथेली के नीचे कुछ सख़्त महसूस किया। मेरा मन किसी अज्ञात भय से ग्रसित हो गया और उसके बाद मैं किसी भी चीज़ पर ध्यान केंद्रित नहीं कर सकी। मैं तब से असामान्य रूप से शांत हो गई। मैंने कुछ महीनों के लिए इसके बारे में किसी को नहीं बताया, आशाओं के खिलाफ उम्मीद थी कि यह कुछ जादू से अपने आप ही गायब हो जाएगा। लेकिन अफसोस, यह नहीं होना था और यह आकार में बढ़ता गया। 4 महीने तक चुपचाप पीड़ा को सहने के बाद, मैंने आखिरकार एक डॉक्टर से मिलने का फैसला किया। और मुझे एक बीमारी का संकेत दिया गया, जिसके बारे में मैं भयभीत हो रही थी और सुनने के लिए तैयार नहीं थी।

और फिर, एफएनएसी, बायोप्सी, मैमोग्राम, पीईटी स्कैन के रूप में परीक्षण के दौर से मुझे गुजरना पड़ा, और मुझे अंततः स्थानीय रूप से उन्नत स्तन कैंसर होने का पता चला। और फिर मुझे सर्जरी के लिए उपयुक्त बनाने के लिए ट्यूमर के आकार को छोटा करने के लिए कीमोथेरेपी दिया गया। महीनों के रक्त परीक्षण के बाद, अनगिनत सुई चुभन, बहुत सारे बालों के झड़ने के बाद, उल्टी के दौरे, और कई बार लगातार अस्पताल जाने के बाद मेरी सर्जरी का समय आया। मुझे डॉक्टर के केबिन के बाहर बैठने के लिए कहा गया था और मेरे डॉक्टर और मेरे परिवार के बीच धीमी आवाज़ में कुछ गंभीर चर्चा चल रही थी। मैं निर्णय लेने वालों में शामिल नहीं थी। और अगले दिन मुझे सर्जरी के लिए ले जाया गया। जब मैं एनेस्थीसिया के बाद अगले दिन उठी, तो मेरा एक स्तन कटा हुआ था, हां आपने इसे सही सुना, यह मेरे शरीर से पूरी तरह से कटा हुआ था और मुझे मेरी गरिमा के बिना छोड़ दिया गया था, जीवन भर के लिए मेरा आत्म-सम्मान खत्म हो चुका था। मैंने इसे स्वीकार कर लिया क्योंकि मेरे पास इसके अलावा और कोई चारा नहीं था। और फिर मेरी विकिरण चिकित्सा शुरू हुई।

एक दिन मेरे विकिरण ऑन्कोलॉजिस्ट ने लापरवाही से मुझसे पूछा कि मैंने अपने स्तन को संरक्षित करने का चुनाव क्यों नहीं किया? यह सवाल मेरे लिए एक बिजली के झटके की तरह आया और मैंने वापस पूछा – क्या यह मेरे मामले में एक विकल्प था? उन्होनें मुझे बताया कि विकिरण के साथ या बिना विकिरण के पूर्ण निष्कासन या आंशिक निष्कासन मेरे लिए समान परिणाम देते। उन्होनें मुझे स्तन पुनर्निर्माण और कृत्रिम अंग के विकल्प के बारे में भी बताया, जिनसे मैं तब तक अनजान थी।

और फिर मैं ऐसा रोई जैसा कि मैं वर्षों में कभी नहीं रोई थी, तब भी नहीं जब मुझे पता चला था कि मेरे स्तन में ट्युमर था। मैंने अपने परिवार से पूछा – स्तन संरक्षण के विकल्प पर मेरे साथ चर्चा क्यों नहीं की गई? उन्होंने मुझे बताया कि चूंकि वे संरक्षित स्तन में बीमारी की पुनरावृत्ति से डरते थे और वे पहले मेरी सुरक्षा चाहते थे, उन्होंने मास्टोमी करवाने का फैसला किया था। उनके लिए यह बहुत ठोस जवाब था लेकिन इसके लिए मैंने अपनी मानसिक शांति की कीमत चुकाई। मुझे पता है कि वे मुझसे बेहद प्यार करते हैं लेकिन काश उन्होंने मुझसे पूछा होता कि मुझे क्या चाहिए। लेकिन मैंने पहले ही अपने स्तन को संरक्षित करने का मौका खो दिया था।

मेरे पास पूछने के लिए एक प्रश्न है। क्या किसी ने कभी ये सोचा कि मुझे क्या चाहिए था? क्या किसी ने कभी ये सोचा था कि कटा हुआ स्तन मुझे हर दिन कैंसर की याद दिलाता रहेगा? क्या कभी किसी ने यह सोचा कि इसने मेरी शारीरिक छवि, मेरे आत्मविश्वास, मेरे आत्मसम्मान को कैसे प्रभावित किया है? क्या किसी ने ध्यान दिया कि मैंने अपने घर से बाहर निकलना क्यों बंद कर दिया था, जबकि मैं बाहर निकलने के लिए बेताब थी? क्या किसी ने सोचा था कि बीमारी केवल मेरे शरीर के एक हिस्से में थी, और तर्कसंगत निर्णय लेने के लिए मेरा दिमाग अभी भी पूरी तरह से बरकरार और काम कर रहा था? यदि किसी पुरुष को अपना वृषण निकलवाना पड़ा होता, तो क्या निर्णय रोगी का होता या उसके परिवार का?

कब तक एक महिला को उसकी अज्ञानता या भय के कारण उसकी गांठ को छिपाने के लिए दंडित किया जाएगा? काश पुरुषों से ज्यादा यदि महिलाएं अपने स्तनों पर अधिक ध्यान दिया करती तो बहुत सारे कैंसर का पता समय पर लगाया जा सकता था। सभी के लिए एक सविनय अनुरोध – बड़ा या छोटा, यदि संभव हो तो सभी स्तनों को बचाएं। सच्चाई यह है कि हमें अपनी आवाज़ के महत्व का एहसास तभी होता है जब हम गूंगे हो जाते हैं।

कृपया याद रखें: महिलाएं सबसे अच्छी चीजें हैं जो हमारी सभ्यता में सभी दशकों, युगों या कालखंडों में हुईं, चाहे वह लक्ष्मी बाई, सीता, द्रौपदी या मदर टेरेसा हों। तो, आइए सभी हमारे जीवन में महिलाओं को सुनें और सहयोग करें और उनके निर्णयों पर विश्वास करें। उसे केवल उसके बाहरी आवरण पर ही नहीं, बल्कि उसकी दिव्य आत्मा पर भी अपना दावा करने दें। उन्हें अपने स्वयं के जहाजों का कप्तान बनने दें। उन्हें अपनी खुशी का आर्किटेक्ट बनने दें। उन्हें खुद से थोड़ा अधिक होने दें और बाकी सब से थोड़ा कम। उसे उसके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी लेने दें। कैंसर को जान लेने दें कि उसने गलत लड़की के साथ खिलवाड़ किया। उन्हें अपने भीतर के उत्साह को उजागर करने दें।

इसलिए, कई भावनाएँ अनकही रह जाती हैं लेकिन कृपया …

उसके स्तन: उसका निर्णय!!

डॉ. इंदु बंसल अग्रवाल | वरिष्ठ सलाहकार – ऑन्कोलॉजी, विकिरण ऑन्कोलॉजी | नारायणा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल, गुरुग्राम

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