Categories: Cardiac Surgery

हृदय वॉल्व शल्यचिकित्सा

हृदय वॉल्व शल्यचिकित्सा किसे कहते हैं?

हृदय वॉल्व शल्यचिकित्सा खराब हृदय द्वार (वॉल्व) को बदल देती है या उसमें सुधार कर देती है। हृदय में रक्त आने और बाहर निकलने में हृदय वॉल्व एक महत्वपूर्ण प्रणाली है। ये वॉल्व पर्याप्त रूप से खुलते हैं ताकि रक्त प्रवाहित हो सके। हृदय वॉल्व शल्यचिकित्सा, हृदय-फेफड़ों में वैकल्पिक यंत्र या वैकल्पिक रूप से खींचने वाला यंत्र को जोड़ने के लिए किया गया शल्यचिकित्सा (ओपन-हार्ट सर्जरी) का अक्सर इस्तेमाल किया जाने वाला सामान्य रूप है।

हृदय वॉल्व की समस्या किन कारणों से होती है?

भारत में हृदय वॉल्व की बीमारी अक्सर बचपन में हृदय की बीमारियों के कारण होती है। यह कई वर्षों में  धीरे–धीरे हृदय वॉल्व को नुकसान पहुंचा सकता है।

पश्चिमी देशों में हृदय वॉल्व की समस्याएं अपक्षयी मायक्सोमेटस के माध्यम से होती हैं – हृदय के मिट्रल वॉल्व को प्रभावित करने वाला संयोजी ऊतक क्रम। विभिन्न हृदय कक्षों और धमनियों में काम करनेवाले चार हृदय वाल्वों में, हृदय के मिट्रल और महाधमनी वॉल्व के संक्रमित होने का अधिक खतरा होता है।

सुधार या प्रतिस्थापन:

हृदय वॉल्व शल्यचिकित्सा में प्रभावित हृदय वॉल्व की मरम्मत करना या उसे बदलना शामिल हो सकता है। महाधमनी वॉल्व में मरम्मत असामान्य है और इसकी सफलता की दर कम है, इसलिए महाधमनी वॉल्व मरम्मत के लिए अक्सर शल्यचिकित्सा किया जाता है।

गठिया रोग सम्बन्धित बीमारी के प्रारंभिक चरणों में मिट्रल वॉल्व में मरम्मत की जा सकती है।

मरम्मत, प्रतिस्थापन से बेहतर विकल्प है क्योंकि यह एक मरीज के जीवनकाल को बढ़ाता है और एक सामान्य जीवनशैली के लिए कम बाधाओं का कारण बनता है। बचपन और प्रसव उम्र की महिलाओं में मरम्मत की जाती है। वॉल्व मरम्मत में हालांकि एक खामी है की एक और शल्यचिकित्सा की आवश्यकता होगी अगर मरम्मत कुछ वर्षों के बाद विफल हो जाती है। अगर वॉल्व बहुत दोषपूर्ण और मरम्मत से परे हो तो हृदय के वॉल्व को बदलना अनिवार्य हो जाता है।

प्रतिस्थापन के लिए उपयोग किए जाने वाले हृदय वॉल्व के प्रकार:

जंतुपरक वॉल्व – पशु ऊतक से बनाया जाता है

यांत्रिक वॉल्व – एक विशेष प्रकार के कार्बन मिश्र धातु से बनाया जाता है

जंतुपरक वॉल्व लगभग 15 साल तक रह सकता है और 60 साल से अधिक उम्र के रोगियों के लिए इसकी सिफारिश की जाती है। यह वॉल्व युवा रोगियों के लिए आदर्श नहीं है क्योंकि जंतुपरक वॉल्व की अवधि अधिक तेज़ी से समाप्त हो जाती है।

मैकेनिकल वॉल्व अधिक लंबे समय तक चलने वाला होता है और यहां तक कि जीवन भर भी रह सकता है। इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि यांत्रिक वॉल्व के मरीज को पूरे जीवनभर के लिए रक्त को पतला करने वाली दवा की आवश्यकता होती है। इस जीवन रक्षक दवा को बिना चूके तत्परता पूर्वक लिया जाना चाहिए। वॉल्व प्रतिस्थापन के रोगियों को चोट, संक्रमण और विटामिन‘के’युक्त खाद्य पदार्थों से बचना चाहिए क्योंकि वे रक्त के थक्के जमने में सहायता करते हैं।

यांत्रिक हृदय वॉल्व आमतौर पर विफल नहीं होता है। दवाओं के नियमित सेवन, नियमित चिकित्सा जांच और चिकित्सक से परामर्श के साथ रक्त के थक्के जमने जैसी जटिलताओं से बचा जा सकता है। यांत्रिक हृदय वॉल्व चुटकी जैसा ध्वनि पैदा करता है जिसे रोगी सुन सकता है।

हृदय वॉल्व शल्यचिकित्सा की सफलता दर उच्च है जो रोगियों को एक सामान्य जीवन जीने में सक्षम बनता है।

डॉ मृणालेंदु दास, एमएस, एमसीएच, एफआईएसीएस, वरिष्ठ सलाहकार – हृदय शल्यचिकित्सा, रविंद्रनाथ टैगोर अंतरराष्ट्रीय हृदय विज्ञान संस्थान, कोलकाता

Narayana Health

Recent Posts

WORLD ASTHMA DAY 2021: Uncovering Asthma Misconceptions

Time when the entire world is struggling even to breathe, asthma patients challenges are unimaginable,…

2 days ago

बीमारियों पर कोविड संक्रमण का असर, कोविड वैक्सीन कितनी कारगर?

कोविड महामारी का दौर एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहा है। देश के बहुत…

6 days ago

Suicidal thoughts: How to deal with them?

Having suicidal thoughts is not uncommon. These kinds of negative thoughts occur to a majority…

7 days ago

Oral cancer: prevention and treatment

What is oral cancer Oral cancer or mouth cancer include cancer of lip, tongue, area…

1 week ago

Biopsy

What is a biopsy? A biopsy is a procedure in which we take the sample…

1 week ago

Bone sarcoma

Bone is mesenchymal tissue (dense connective tissue). Cancer in bone could be primary and secondary.…

1 week ago