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मस्तिष्क का आघात

आघात एक आपात चिकित्सा है जो बहुत बड़ी जनसंख्या की मौत और विकलांगता का एक प्रमुख कारण है। आमतौर पर, यह बुजुर्गों को प्रभावित करता है, लेकिन लगभग 10% आघात युवावर्ग को भी होता है, जिसकी वजह से कई परिवारों और बाकी देखभाल करने वाले लोगों को भारी भावनात्मक और आर्थिक तनाव झेलना पड़ता है।

80% से अधिक प्रभावित लोगों को स्थानिक-अरक्तता संबंधी आघात होता है, जिसमें थ्रोम्बस (थक्का) या एम्बोलस का निर्माण हो जाता है जिसके कारण मस्तिष्क  में रक्त का जाना रुक जाता है और इसकी वजह से तंत्रिका कोशिकाएं जख्मी हो जाती हैं ढेर सारी कोशिकाओं की मृत्यु हो जाती है।

उच्च और अनियंत्रित रक्तचाप, मधुमेह, उच्च कोलेस्ट्रॉल, मोटापा, धूम्रपान और शराब के सेवन की आदत वाले लोगों को मbraस्तिष्क का आघात होने का खतरा बना रहता है। कुछ दिल की बीमारियां जैसे अलिंद विकम्पन और वातरोगग्रस्त ह्रदय रोग से भी आघात का खतरा बढ़ जाता है। जितना ज्यादा जोखिम के कारक बढ़ेंगे, आघात की संभावना उतनी ही ज्यादा बनी रहेगी।

इसके निदान में देरी का मुख्य कारण हैं: इसके बारे में जागरूकता की कमी तथा इसके लक्षणों की पहचान बहुत देर से होती है। आघात के लक्षणों की त्वरित और समय पर पहचान के लिए प्रत्येक व्यक्ति को F.A.S.T को याद रखना चाहिए। फ़ास्ट में F यानी चेहरे का अचानक एक तरफ झूलने लगना, A मतलब हाथों में या पैरों में एकाएक कमजोरी या उनका सुन्न पड़ना या शरीर का आधा भाग सुन्न पड़ने लगना, S का मतलब है बोलने में दिक्कत होने लग्न और T बताता है कि वे समस्याएं कब से हैं। कुछ लोगों का संतुलन बिगड़ने लगता है, समन्वय में कठिनाई होने लगती है, देखने में दिक्कत या उल्टी की समस्या हो सकती है।

कभी-कभी ऐसे लक्षणों को देखने के बाद रिश्तेदार भ्रमित हो जाते हैं, और उनकी समझ में नहीं आता कि कहां जाना है। मरीज को तुरंत आघात आपातकाल तैयार अस्पताल में ले जाया जाना चाहिए, जिसमें चौबीसों घंटे डायग्नोस्टिक और लेबोरेटरी सेवाएं काम करते हों, जहाँ प्रशिक्षित न्यूरोफिजिशियन, न्यूरोसर्जन हों और उनकी विशेषज्ञ की समर्पित टीम हो, तथा जो आईवी टी-पीए, अंतर्वाहिकी ट्रॉम्बेक्टॉमी आदि करवा सकते हों। तीव्र स्थानिक-अरक्तता संबंधी आघात की स्थिति में, लक्षणों की शुरुआत होने पर 4.5 घंटे के भीतर अंत:शिराभ टी-पीए दिया जाना चाहिए और कुछ संदेह को दूर करने के बाद अंतर्वाहिकी उपचार को 6 घंटे के भीतर दिया जाना चाहिए। मस्तिष्क आघात में लगभग 30000 मस्तिष्क कोशिकाएं हर सेकंड मरते हैं इसलिए जितनी जल्दी हो सके, मरीज को आवश्यक मदद देनी चाहिए।

डॉ. कमल के. नागर | सलाहकार – न्यूरो फिजिशियन | नारायणा मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, अहमदाबाद

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