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हार्ट पेशन्ट्स को नया जीवन दे रही री-डू सर्जरी

पिछले डेढ-दो दशक में हृदय रोग की समस्याओं में कई गुना वृद्धि हुई है। यही कारण है कि हार्ट प्रोसिजर एवं सर्जरी के मामले भी बढ़ गये है। नई तकनीकों द्वारा सफल इलाज के कारण ऐसे मरीजों की औसत आयु भी बढ़ी है। चुनिंदा रोगियों में कई कारणों से 7 से 12 वर्षों बाद, हृदय की समस्याऐं फिर से हो जाती है, जिसके लिए उन्हें री-डू कार्डियक सर्जरी कराना आवश्यक हो जाता है।

आज भी लोग दोबारा हार्ट सर्जरी कराने से डरते है, यह आम धारणा है कि दोबारा हार्ट सर्जरी कराने से जान जा सकती है। लेकिन ऐसा नहीं है, कार्डियक सर्जरी क्षेत्र में लगातार आ रही नई तकनीकों के कारण री-डू सर्जरी पहले के मुकाबले ज़्यादा सफलतापूर्वक होने लगी है बशर्ते यह एक स्पेश्लाइज्ड सेन्टर में कराई जाये। री-डू सर्जरी के बाद मरीज सामान्य ज़िन्दगी जी सकता है और उसे चलने में दिक्कत, सांस फूलने जैसी परेशानियों से भी निजात मिल जाती है।

निम्नलिखित स्थितियों में री-डू सर्जरी के संकेत दिये गयें हैः

  • वॉल्व सम्बंधी परेशानी फिर से हो जाना (वॉल्व में इंफैक्शन, कैलसिफिकेशन, आसपास टिश्यू बढ़ जाना, मिकैनिकल वॉल्व डिसफंक्शन, खून का थक्का हो जाना, वॉल्व ठीक से काम नहीं करना आदि)।
  • धमनियों में नये रोग, ग्राफ्ट बंद हो जाना आदि के कारण री-डू बाईपास सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।
  • जन्मजात हृदय विकार ठीक करने की ऐसी सर्जरी जो दो चरणों में होती है या सर्जरी के बाद भी विकार ठीक न होना आदि में री-डू सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है।

री-डू सर्जरी में क्यों है अनुभवी टीम की ज़रूरत?

मरीज के पहले हार्ट ऑपरेशन की तुलना में री-डू सर्जरी ज़्यादा जटिल एवं जोखिम भरी रहती है और ऑपरेशन में भी 8 से 10 घंटे तक लग जाते है। हृदय जैसे महत्त्वपूर्ण भाग की सर्जरी बार-बार करने में ऑपरेशन टेबल पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता हैं, ऐसे में सही निर्णय लेने के लिए, अनुभवी कार्डियक सर्जन की भूमिका महत्त्वपूर्ण होती है। साथ ही एनस्थिसिया व क्रिटिकल केयर टीम अनुभवी होना ज़रूरी है क्योंकि सर्जरी के बाद भी अगले 2-3 दिन मरीज की रिकवरी के लिए बेहद महत्त्वपूर्ण है।

दो से ज़्यादा बार भी सर्जरी संभव:

यह ज़रूरी नहीं की री-डू सर्जरी एक ही बार होती है। कई मरीज ऐसे भी हैं जिनकी दो से ज़्यादा बार भी सफल हार्ट सर्जरी की जा चुकी है और वर्तमान में वे सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

जटिल है सर्जरी, अनुभव महत्त्वपूर्ण:

पहले की गई कार्डियक सर्जरी के परिणामस्वरूप प्रभावित भागों में एडहीशन्स बन जाते है। यह एडहीशन्स चेस्ट के स्ट्रकचर के बीच में होने से, हार्ट को फिर से खोलने में बेहद मुश्किल होती है। ऐसे में एक सर्जन को छाती में सुरक्षित रूप से पहुंचने और दिल के अन्य हिस्सों को नुकसान पहुंचायें बिना, प्रभावित भाग का ऑपरेशन करने के लिए काफी अनुभव की ज़रूरत होती है। एक अनुभवी एवं दक्ष कार्डियक सर्जन ही ऐसी मुश्किल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दे सकता है। बेहतर डायग्नोस्टिक सिस्टम के कारण अब हम पहले ही भांप लेते है कि किन मरीजो में भविष्य में री-डू सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है, इसलिए समय रहते इलाज शुरू कर दिया जाता है जिससे बेहतर परिणाम मिल सके।

पहले के मुकाबले अब ज़्यादा सुरक्षित-री-डू सर्जरी:

कार्डियक सर्जरी क्षेत्र में आयी नई तकनीके, री-डू सर्जरी करने के अनुभव में विकास, बेहतर मोनिटरिंग सिस्टम, बेहतर डायग्नोस्टीक्स एवं नई दवाइयाँ जो रक्तस्त्राव को काफी हद तक रोक सकती है-कुछ ऐसे ही कारण है जिससे री-डू सर्जरी पहले के मुकाबले काफी सुरक्षित हो गयी है।

विशिष्ट हार्ट सेन्टर का ही करें चुनाव:

री-डू सर्जरी के एक्सपर्ट सभी हाई रिस्क फैक्टर को अत्याधुनिक तकनीक एवं अपने अनुभव के साथ हैण्डल करते है। सही निदान एवं सुरक्षित इलाज के लिए मरीज को एक स्पेश्लाइज्ड हार्ट सेन्टर का ही चुनाव करना चाहिए जहाँ की सर्जिकल एवं सपोर्ट टीम को काफी अनुभव हो।

डॉ. सी.पी. श्रीवास्तव, डायरेक्टर एवं विभागाध्यक्ष-कार्डियक सर्जरी, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर

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