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हर्नियेटेड डिस्क और इसके कारण

मानव मेरुदण्ड केंद्रीय नरम तंत्रिका को नियंत्रित करने वाला हिस्सा है जो मोटी हड्डी कशेरुकाओं (वर्टिब्र) के नीचे होता है। यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से अति आवश्यक है क्योंकि रीढ़ की हड्डी में चोट के परिणामस्वरूप पक्षाघात हो सकता है। दो कशेरुकाओं (वर्टिब्र) के बीच डिस्क नामक छोटी नरम परत होता है। मेरुदण्ड तंत्रिका पूरे शरीर में संवेदना और मोटर गतिविधि को आपूर्ति करता है।

प्रत्येक डिस्क में केंद्रीय नरम हिस्सा और बाहरी रबर वाला हिस्सा होता है। जब यह नरम आंतरिक भाग किसी बाहरी या आंतरिक कारण के कारण बाहरी रबर वाले हिस्से से बाहर निकल जाता है, तो इसे हर्नियेटेड या स्लिप्ड डिस्क या डिस्क प्रोलैप्स या प्रोलैप्सड इंटर वर्टेब्रल डिस्क के रूप में जाना जाता है। हर्नियेटेड डिस्क आमतौर पर पीठ में होता है (वर्टिब्र 4 और 5 के बीच) क्योंकि शरीर के इस हिस्से में चोट लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। यह हर्नियेटेड डिस्क कशेरुकाओं (वर्टिब्र) से आने वाली तंत्रिका पर भार दे सकता है।

नर्व कम्प्रेशन आगे चलकर इसके लक्षण के रूप में सामने आता है:

  1. निर्दिष्ट स्थान पर दर्द
  2. शूटिंग / दर्द फूटना
  3. झुनझुनी
  4. सुन्न होना
  5. कमजोरी
  6. पतला होना / क्षय
  7. पक्षाघात भी हो सकता है
  8. पीठ में अकड़न
  9. जलन के साथ दर्द
  10. ऐंठन
  11. अनुभूति की छमता का नुकसान
  12. समन्वय स्थापित करने की छमता में ह्राश
  13. यौन क्षमता में कमी आना
  14. आंत्र और मूत्राशय संबंधित समस्याएं
  15. फुट ड्रॉप (कमजोरी और पैर में लंगड़ापण आना) हर्नियेशन के स्तर के आधार पर

हर्नियेशन के स्तर के आधार पर इसके लक्षण इनमें से कुछ से लेकर सभी के संयोजन के रूप में दिख सकता है।

बढ़ाने  वाले  कारक:

  • असामान्य वजन जैसे तोंद निकलना
  • शारीरिक रूप असामान्य मेहनत वाला काम जैसे भार उठाना, झुकना, खींचना, धक्का देना, घुमाना आदि
  • आनुवंशिक प्रवृतियां
  • धूम्रपान, जो सीधे ऑस्टियोपोरोसिस के अनुरूप है और इस प्रकार हर्नियेटेड डिस्क है

हर्नियेटेड डिस्क के कारण:

हर्नियेटेड डिस्क उम्र से संबंधित डिस्क के डिजनरेशन के कारण होने वाले टूट – फूट के कारण होती है। कुछ मामलों में कमजोर हड्डियां या ऑस्टियोपोरोसिस भी PIVD को जन्म दे सकती हैं। बढ़ती उम्र के साथ आपके शरीर में धीरे-धीरे घिसाव की प्रक्रिया शुरू होता है, जिससे पीठ कड़ा होता जाता है और इसमें ऐंठन तक पैदा हो जा सकता है।

इसी तरह, भारी वजन उठाने, व्यावसायिक या जिम में प्रदर्शन करते समय, एक व्यक्ति वजन उठाने के लिए जब गलत तकनीक और गलत मांसपेशियों का उपयोग करता है तो उससे पीठ पर असामान्य खिंचाव पैदा होता है जिसके परिणामस्वरूप भी PIVD विकसित हो सकता है।

किसी मामले में एक आघात भी हर्नियेटेड डिस्क का कारण बन सकती है।

सक्रिय जीवन शैली, विशेष रूप से खिलाड़ियों और वेट लिफ्टर्स के लिए रोकथाम के उपाय से अवगत रहना अत्यंत आवश्यक है। भारी गतिविधि को करने का एक विशिष्ट तरीका होता है, जिसकी चर्चा हम यहां करेंगे।

  1. व्यायाम: आप व्यायाम करते है, अपने व्यायाम में पीठ को मजबूत करने वाले व्यायामों को शामिल करें। एब्डोमिनल और पीठ के लिए सरल आइसोमेट्रिक अभ्यास करने में कोई दिकत नहीं है।
  2. पोस्टुरल सलाह: लंबे समय तक बैठे रहने के दौरान अपनी पीठ को सीधा रखें। हर 2 घंटे में ब्रेक लें, टहलें और फिर काम में लगें। भारी भार को अपने शरीर के करीब रखें। जमीन से उठाते समय, पीछे से झुकने के बजाय वजन के करीब बैठें। डंबल या बॉडी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज में मशीन खींचते समय अपनी पीठ को स्थिर और सीधा रखें।
  3. वजन को नियंत्रित रखें: शेप में रहना में अच्छा होता है। रात में खाना जल्दी खाएं और भोजन के तुरंत बाद जायदा पानी का सेवन न करें।
  4. धूम्रपान छोड़ें: प्रदूषण को कम करने और ऑस्टियोपोरोसिस और हर्नियेशन से अपने पीठ को बचाने के लिए एक कारक को कम करें। आपको अन्य तंबाकू उत्पादों को भी छोड़ना होगा।

डॉ. अनुराग सक्सेना, सीनियर कंसलटेंट – न्यूरोसर्जरी, स्पाइन सर्जरी, नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम

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