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स्तन कैंसर में रेडिएशन थेरेपी – एक क्रमबद्ध दृष्टिकोण

परिचय

रेडिएशन थेरेपी कैंसर सेल्स को रेडिएशन के माध्यम से मारने तरीका है। रेडिएशन थेरेपी में उपयोग किए जाने वाले उच्च तीव्रता वाले ऊर्जा बीम ज्यादातर एक्स-रे के माध्यम से दिए जाते हैं। इस उद्देश्य के लिए कुछ अवसरों पर एक्स-रे के बजाय प्रोटॉन का भी उपयोग किया जा सकता है।

रेडिएशन थेरेपी की सिफारिश कब की जाती है?

रेडिएशन थेरेपी का उपयोग स्तन कैंसर के सभी चरणों में किया जाता है, आमतौर पर सर्जरी के बाद।

पोस्ट-सर्जिकल इंटरवेंशन:

  • यह सर्जरी के बाद होने वाले स्तन कैंसर के खतरे को कम करता है।
  • कैंसर के कारण होने वाले लक्षणों को कम करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है।
  • यह मेटास्टेटिक स्तन कैंसर के मामले में इसके प्रसार को सीमित करता है।

स्तन कैंसर शहरी भारत में सबसे आम कैंसर है और ग्रामीण भारत में दूसरे न. का कैंसर है। भारत में 2012 में एक अनुमान के अनुसार 70,218 महिलाओं की स्तन कैंसर से मृत्यु हुई, जो दुनिया में सबसे अधिक है।

स्तन कैंसर में क्रमबद्ध दृष्टिकोण का उपयोग किया जाता है। जैसे –

  • कैंसर सेल्स का प्रकार
  • कैंसर कितना फैला है
  • आयु
  • स्तन का आकार
  • ट्यूमर का आकार और स्थान (स्तन में)

कदम दर कदम पद्धति:

  • कीमोथेरेपी से शुरू करें
  • उसके बाद मास्टेक्टॉमी या स्तन-संरक्षण सर्जरी
  • फिर 20-30 दिनों के बाद रेडिएशन शुरू करते हैं जिसके एक महीने में कई सत्रों दिए जाते हैं।

स्तन कैंसर में रेडिएशन थेरेपी कैसे दी जाती है?

सर्जरी के बाद दो तरह के प्रक्रिया होती है –

  1. एक्सटर्नल बीम स्तन कैंसर – सामान्य
  • दर्द नहीं होता
  • उपचार किए जाने वाले क्षेत्र को चिह्नित किया जाता है और एक्स-रे से बीम प्रभावित जगह पर दिया जाता है।
  • सत्र लगभग 5-10 मिनट तक चलता है।
  • सप्ताह में पाँच दिन लगभग पाँच से सात सप्ताह लेना होता है।

दुष्प्रभाव:

  • थकान
  • लालिमा या कोमल त्वचा
  • स्तनों में सूजन
  • फफोले या त्वचा का छीलना

लम्बे समय तक रहने वाले दुष्प्रभावों में शामिल हैं:

  • छोटे स्तन
  • स्तनपान के साथ समस्याएँ
  • नर्व डैमेज
  • हाथ या छाती में सूजन और दर्द

दुर्लभ दुष्प्रभावों में कमजोर या पसलियों का टूटना या रक्त वाहिका लाइनिंग से संबंधित कैंसर शामिल हैं।

  1. इंटरनल ब्रैस्ट कैंसर रेडिएशन या ब्रैकीथेरेपी
  • रेडियोधर्मी (Radioactive) सीड्स को प्रभावित क्षेत्र में एक उपकरण के माध्यम से दिया जाता है।
  • कम अवधि – एक सप्ताह
  • कम दुष्प्रभाव

रेडिएशन के प्रभाव को बढ़ाने के लिए दोनों प्रक्रियाएं समंवय में की जाती है।

इंटरनल  रेडिएशन के संभावित दुष्प्रभाव हैं:

  • जी मिचलाना
  • लालिमा
  • स्तन में दर्द
  • चोट
  • संक्रमण
  • स्तन वसा ऊतक का टूटना
  • दुर्लभ मामलों में पसलियों की कमजोरी और फ्रैक्चर

ब्रैकीथेरेपी का आगे वर्गीकरण:

इंटरस्टीशियल ब्रैकीथेरेपी जिसमें सर्जरी के बाद कई ट्यूब को ब्रेस्ट में डाले जाते हैं । ये ट्यूब कई दिनों तक दिन में 2-3 बार प्रभावित क्षेत्र में रेडियोधर्मी पेलेट्स छोड़ते हैं।

इंट्राकवेटरी ब्रैकीथेरेपी इसमें डिवाइस जैसी एक ट्यूब आपके स्तन में रखा जाता है जिसका एक बहार निकला होता है। इस के माध्यम से रेडिएशन अंदर डाला जाता है। उपचार 5 दिनों तक दिन में दो बार लेना होता है।

इंट्राऑपरेटिव रेडिएशन:

  • यह प्रक्रिया तब चुनी जाती है जब ट्यूमर स्वस्थ टिश्यू के नजदीक होता है और ऐसे में स्वस्थ टिश्यू को रेडिएशन का खतरा बना होता है लिए बाहरी
  • सर्जरी के दौरान, कैंसर के टिश्यू के संपर्क में आने के बाद, एक ही हाई डोज़ बीम डाली जाती है, जो स्वस्थ टिश्यू के बाकी हिस्सों को बचाती है।
  • प्रारंभिक चरण स्तन कैंसर के उपचार के लिए सबसे उपयुक्त है।
  • इसके माध्यम से दिया जा सकता है
  1. लीनियर एक्सेलरेटर 2 मिनट के लिए
  2. 10 मिनट के लिए एक छोटा उपकरण

प्रक्रिया के कम दुष्प्रभाव हैं।

अनुमानित परिणाम:

विभिन्न अध्ययनों ने बताया है कि जिन महिलाओं का स्तन कैंसर का उपचार होता है उनकी औसत 10 साल जीवित रहने की दर 83% है। यदि कैंसर केवल स्तन में स्थित है, तो स्तन कैंसर वाली महिलाओं की 5 साल रहने की दर 99% है। यदि कैंसर क्षेत्रीय लिम्फ नोड्स में फैल गया है, तो 5 साल जीवित रहने की दर 85% है।

स्तन कैंसर के उपचार में रेडिएशन थेरेपी वास्तव में एक व्यवस्थित दृष्टिकोण है और यह केवल उन महिलाओं को दिया जाता है जिन्हें अन्य उपचार माध्यमों  के साथ इसकी जरुरत होती है।  सबसे अच्छी बात यह है कि इसकी सफलता दर NO CANCER का आश्वासन देती है !!

डॉ. इंदु बंसल, सीनियर कंसलटेंट – रेडिएशन ऑन्कोलॉजी, नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम

Narayana Health

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