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सिर्फ कोविड नेगेटिव नहीं, कोविड से पूर्ण रिकवरी हैं महत्वपूर्ण!

सिर्फ कोविड नेगेटिव नहीं, कोविड से पूर्ण रिकवरी हैं महत्वपूर्ण!
हमारे फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स और सरकार के निरंतर प्रयासों की बदौलत भारत का कोविड-19 रिकवरी दर उच्चतम है। हमारे देश में आधिकारिक रूप से 81 लाख से अधिक मरीज रीकवर हो चुके हैं (13 नवम्बर तक)। हालांकि इस दौरान ऐसे मामलों में भी बढ़ोतरी हुई है जो पोस्ट कोविड सिंड्रोम (कोविड पश्चात् जटिलताओं) से जूझ रहे हैं।
पोस्ट कोविड सिंड्रोम
पोस्ट कोविड सिंड्रोम का मतलब है कोरोना वायरस से संक्रमित मरीज नेगेटिव होने के बाद भी कई दिनों या महीनों तक उससे जुड़े हुए लक्षणों या दुष्प्रभावों को अनुभव करता रहता है जिससे उसके जीवन की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। कोविड संक्रमण से जुड़े दुष्प्रभाव सिर्फ गंभीर मामलों (यानि जो मरीज संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती हुए है) तक सीमित नहीं रहते, जिन मरीजों को माईल्ड या मोडरेट इंफेक्शन हुआ है उनमें भी कोविड पश्चात् जटिलताऐं होने की संभावना रहती है।
कोविड पश्चात् लक्षण जो लम्बे समय तक बने रह सकते हैं-
– लंबे समय तक सांस लेने में कठिनाई
– अत्याधिक थकान या कमजोरी
– मांसपेशियों या नर्व में कमजोरी/सुन्नपन
– चलने-फिरने में कठिनाई होना
– मूड में बदलाव या डिप्रेशन
– लगातार दस्त, तेजी से वजन कम होना या अन्य पाचन संबंधी समस्याएं
– ध्यान केंद्रित करने में परेशनी, चक्कर आना या भ्रम होना
– याद्दाश्त में कमी
– त्वचा पर दाग या चकत्ते
– भूख में कमी, स्वाद और सुंघने की क्षमता प्रभावित होना
– नींद न आना
– असामान्य दिल की धड़कन
कोविड संक्रमण पश्चात् संभावित दुष्प्रभाव
– फेफड़ों की क्षमता और क्रियाशीलता में खराबी
– शरीर में आंतरिक सूजन
– शरीर की मांसपेशियों या नसों में कमजोरी
– हृदय की कार्य क्षमता प्रभावित होना
– किडनी या लिवर का खराब होना
– असामान्य रूप से हाई शुगर लेवल (उन मरीजों में भी, जिन्हें डायबिटीज डायग्नोस नहीं हुई है)
– हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ना
– रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना
– दिखने में धुंधलापन या सुनाई कम देना
पोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम की आवश्यकता
नेगेटिव टेस्ट आने के बाद भी रोगी को पूरी तरह से ठीक होने और फिर से सक्रिय और स्वस्थ महसूस करने में हफ्तों या महीनों का समय लग सकता है। यह भी ध्यान रखना आवश्यक है कि कोविड संक्रमण, मरीज के फेफड़ों, हृदय, गुर्दे, नसों या किसी अन्य अंग को बिना किसी संकेत के प्रभावित कर सकता है – जिसके लक्षण तुरंत दिखाई नहीं देते लेकिन लंबे समय में कई जटिलताऐं पैदा कर सकते है।
इसलिए वो मरीज जो कोविड नेगेटिव होने के कई दिन बाद भी लगातार कोविड से जुड़े लक्षणों एवं कमजोरी से जूझ रहे है उन्हें एक कॉम्प्रिहेंसिव पोस्ट कोविड रिकवरी प्रोग्राम की आवश्यकता हो सकती है जिसमें विशेषज्ञों द्वारा उनकी पूर्ण रूप से जाँच की जा सकें, आंतरिक अंगों में अगर कोई दुष्प्रभाव हुआ है तो उनका पता लगाया जा सकें एवं सटीक उपचार, फिजियोथेरेपी व पोषण संबंधित सलाह के माध्यम से उनके लक्षणों को नियंत्रित कर जल्द से जल्द रिकवर करने की कोशिश की जा सकें।
Narayana Health

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