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साइड इफेक्ट्स से ज्यादा हैं फायदे रेडियेशन थेरेपी के, न छोड़ें बीच में इलाज

कैंसर के इलाज के रूप में रेडियेशन थेरेपी का इस्तेमाल आम है। लेकिन इस थेरेपी से जुड़े साइड इफेक्ट्स और जोखिमों को लेकर बहुत लोगों में भ्रांति की स्थिति है, यह तक देखा गया है कि बहुत बार मरीज़ इन दुष्प्रभावों के डर से इलाज भी बीच में छोड़ देते हैं। यहाँ तक कि इस तरह की भ्रांतियों में मृत्यु का भी डर शामिल होता है और मरीज़ के परिवार के लोग इलाज के अन्य विकल्प तलाशने लगते हैं। परिणामस्वरुप इलाज में देरी होती जाती है और जोखिम बढ़ता जाता है।

बेशक इस तरह इलाज बीच में छोड़ना या लापरवाही करना सही नहीं है। ज़रूरी है कि इस सन्दर्भ में सही जानकारी का विस्तार किया जाए, क्योंकि रेडियेशन थेरेपी से जुड़े बहुत से जोखिम ऐसे होते हैं जिनसे निपटा जा सकता है। आइये इसे विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं :-

क्या है रेडियेशन थेरेपी? :-

सबसे पहले रेडियेशन थेरेपी को समझें। दरअसल यह कैंसर के इलाज की वह पद्धिति है जिसके तहत रेडियेशन बीम्स कैंसर या ट्यूमर को टारगेट करतीं हैं और उसे नष्ट करने में मदद करतीं हैं। इस प्रक्रिया को अलग अलग विजिट में दोहराया जाता है। कैंसर के इलाज की श्रेणी में रेडियेशन थेरेपी अकेली भी दी जा सकती है या कैंसर के अन्य इलाज के साथ भी दी जा सकती है, यह पूरी तरह संबंधित डॉक्टर के अध्ययन पर निभर करता है।

हाल ही के वर्षों में रेडियेशन थेरेपी में आई आधुनिकताओं के ज़रिये केवल कैंसर को बारीकी से टारगेट करना संभव हुआ है जिससे उसके आस पास के टिश्यू के डैमेज होने या अंगों के खोने का भी जोखिम कम हुआ है। हालाँकि यह कैंसर की स्टेज पर भी निर्भर करता है, और इसलिए भी कहा जाता है कि कैंसर का जितना जल्दी हो सके इलाज शुरू कर देना चाहिए। रेडियेशन वाकई कैंसर के सफल इलाज दे रहा है।

साइड इफेक्ट्स से निपटने के तरीके :-

रेडियेशन थेरेपी के दौरान निश्चित रूप से कुछ शारीरिक बदलाव आते हैं, लेकिन बहुत से जोखिमों से वक़्त और दवाओं के साथ निपटा भी जा सकता है। जैसे कुछ मरीज़ जिनके गले या सर के हिस्से में रेडियेशन थेरेपी चलती है वे अक्सर गले में जलन की शिकायत करते हैं, ऐसे में माउथ वॉश और दवाओं से उस समस्या के समाधान का प्रयास होता है। कुछ मरीज़ इस बात की भी शिकायत करते हैं कि उनका खान पान अवरुद्ध हुआ है और शरीर में पोषक तत्वों की कमी हो सकती है, ऐसे में उनके पोषण को को अलग अलग फीडिंग तकनीकों द्वारा सुनिश्चित किया जाता है और फ़ूड सप्लीमेंट्स भी दिए जाते हैं।

बिना रुके करें रेडियेशन थेरेपी पूरी :-

रेडियेशन थेरेपी की सलाह कैंसर की अलग अलग स्टेजेस पर दी जा सकती है। ऐसे में उससे होने वाले साइड इफेक्ट्स भी अलग अलग हो सकते हैं जिनमे से बहुत से मैनेज किये जा सकते हैं, हालाँकि यह भी मरीज़ की स्थिति पर निर्भर करता है।

लेकिन शर्त यही है कि मरीज़ रेडियेशन थेरेपी के प्रति कोई लापरवाही न बरतें, किसी भ्रम की स्थिति में इलाज बीच में न छोड़ें। डॉक्टर की सलाह पर बिना रुकवाट पूरा इलाज करवाएं, क्योंकि रेडियेशन थेरेपी नियमित रूप से लेना ही सफल इलाज सुनिश्चित करेगा। याद रखें, रेडियेशन अपने आप में जोखिम भरा नहीं है, लेकिन डॉक्टर की सलाह के बावजूद इसे नियमित रूप से न लेना, लापरवाही से बीच में इलाज छोड़ देना जोखिम के रास्ते तैयार कर सकता है। साथ ही रेडियेशन के लिए सही मरीज़ की पहचान भी ज़रूरी है और यह काम संबंधित डॉक्टर के द्वारा किया जाता है।

जोखिम और फायदों पर चर्चा :-

कैंसर की स्टेज, मरीज़ में अन्य रोग और उम्र के अनुसार कैंसर का इलाज हरेक केस के अनुसार अलग हो सकता है। ऐसे में ज़रूरी है कि संबंधित डॉक्टर मरीज़ (यदि व्यस्क हों तो) और परिवार के सदस्यों के साथ बीमारी व इलाज के विषय में जोखिम और फायदों समेत व्यापक चर्चा करें। और उनसे यह भी साझा करें कि किस प्रकार इलाज के प्रति लापरवाही जोखिम खड़े कर सकती है। उदाहरण के लिए एक बहुत बीमार व शारीरिक रूप से अक्षम मरीज़ जिसमें सुधार नहीं हो, ऐसे में साइड इफेक्ट्स व अन्य जोखिमों के बारे में डॉक्टर को मरीज़ के परिवार से ज़रूर अवगत करवाना चाहिए।

समझना होगा कि कैंसर के मरीज़ पहले से ही एक अनिश्चितता व तनाव की स्थिति से गुज़र रहे होते हैं, कोई भी ग़लत फैसला उनपर व्यापक असर डाल सकता है। ऐसे में डॉक्टरों को मरीज़ों को आत्मविश्वास देना चाहिए कि इलाज भले ही जोखिम भरा हो लेकिन उनके लिए यही सही है।

Dr. Kanika Sharma, Clinical Lead & Senior Consultant – Oncology & Radiation Oncology, Dharamshila Narayana Superspeciality Hospital, Delhi

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