Categories: Narayanahealth

समय रहते ठीक हो सकता है जन्मजात हृदय रोग – जानकारी हो तो आसान हो सकता है इलाज!

कुछ न कुछ कमियों के कारण बच्चे में जन्मजात विकृति हो जाती है। इन्हीं में से एक है-जन्मजात हृदय विकार होने से बच्चे के जीवन की गुणवत्ता में काफी प्रभाव पड़ सकता है। जानकारी के अभाव में इसके इलाज में भी काफी दिक्कतें हो सकती हैं। जन्मजात हृदय विकार को लेकर लोगों में कई प्रकार की भ्रांतियां हैं। जबकि सच्चाई इसके काफी उलट है। कुछ ऐसे ही सवाल, जिनके जवाब उम्मीद से अलग हैं।

1. जिन बच्चों को जन्मजात हृदय विकार है, क्या वे लंबी उम्र नहीं जी सकते?
– कई सालों पहले जन्मजात हृदय विकार के साथ जन्म लेने वाले बच्चों के जीने का दर बहुत कम था। लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है। अब बच्चे लंबा जीवन जी सकते हैं। नई सर्जिकल एवं इंटरवेंशनल प्रकियाओं से हृदय विकार को ठीक किया जा सकता है या फिर उसकी गंभीरता को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

2. क्या जन्मजात हृदय विकार वाले बच्चे एक्टिव जिंदगी नहीं जी सकते?
– यदि सर्जरी से उनके विकार ठीक कर दिए जाएं तो जन्मजात हृदय विकार वाले अधिकांश बच्चे एक सक्रिय जिंदगी जी सकते हैं।

3. क्या हृदय विकार के इलाज से पहले बच्चे की एक निश्चित उम्र होनी चाहिए?

– यदि बच्चे को जन्मजात हृदय विकार है तो उसे जन्म के समय भी ऑपरेट किया जा सकता है। ऑपरेशन का समय बच्चे की उम्र और वजन क्या है इससे ज्यादा सर्जरी की उसे तब कितनी जरूरत है उस पर निर्भर करता है। कुछ बीमारीयाँ ऐसी होती हैं जिन्हें देर करने पर उनका इलाज संभव नहीं हो पाता।

4. क्या जन्मजात हृदय विकार सिर्फ बच्चों को ही प्रभावित करते है?
– जन्मजात हृदय विकार बच्चों में होने वाले जन्मजात विकारों में सबसे सामान्य है, जो 100 में से 1 बच्चे को होता है। लेकिन अब व्यस्कों में भी जन्मजात हृदय विकार के आँकडों में हर साल 5% तक की वृद्धि हो रही है। यह इसलिए भी है, क्योंकि कई बच्चे जन्मजात विकार के साथ जन्म लेते हैं और उन्हे बड़े होने के बाद ही अपनी बीमारी का पता चलता है।

5. क्या जन्मजात हृदय विकार में सिर्फ दिल में छेद ही होता है?
– दिल में छेद होना जन्मजात हृदय विकार का सिर्फ एक प्रकार है। इसके अलावा भी सैंकड़ों जन्मजात हृदय विकार होते हैं। वॉल्व में ब्लॉकेज, रक्त वाहिकाओं का असामान्य तरीके से जुड़े रहना, वॉल्व में सिकुड़न, हृदय चेम्बर का अविकसित होना आदि।

6. क्या जन्मजात हृदय विकार के केसों में बढ़ोत्तरी हुई है?
– लोगों में इस समस्या को लेकर जागरूकता बढ़ी है। बेहतर उपकरण इजाद हुयें हैं और जन्म के बाद बच्चे में हृदय विकार की पहचान करने वाले प्रशिक्षित डॉक्टर्स भी उपलब्ध होने लगे हैं। बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के कारण अब अधिकांश बच्चों में जन्म लेते ही इस बीमारी का पता कर लिया जाता है जिससे ऐसा लगता हैं कि उनकी संख्या में बढ़ोत्तरी होने लगी है।

7. जब पीडियाट्रिशन ईकोकार्डियोग्राफी कराने की सलाह देते हैं तो इसका मतलब कोई गंभीर समस्या है?

– बच्चे को ईको जांच के लिए तभी रैफर किया जाता है जब विशेषज्ञ उसकी दिल की धडक़न को असामान्य पाते हैं। बच्चों में धडक़न से र्र्चीीाीी की आवाज आना एक सामान्य समस्या है और जरूरी नहीं हैं कि यह एक गंभीर हृदय रोग से ही जुड़ी हुई हो। कई बार यह आवाज अपने आप ही गायब हो जाती है। हालांकि अगर ईको कार्डियोग्राफी की सलाह दी जाती हैं तो उसे कराना महत्वपूर्ण है, चाहे परिणाम जो भी निकलें।

8. किसी बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से संपर्क करने से पहले क्या हम उसकी समस्या खुद ठीक होने का इंतजार कर सकते हैं?
– सभी जन्मजात हृदय विकृति अपने आप ठीक नहीं होती। कुछ में उचित एवं सही समय सीमा के अन्दर इलाज की भी जरूरत होती है। इसलिए जरूरी है कि आप एक बाल हृदय रोग विशेषज्ञ से बिना समय गंवायें परामर्श करें।

9. क्या सभी जन्मजात हृदय विकृति में ओपन हार्ट सर्जरी होती है?
– यह सच नहीं है। कुछ विकृतियां ओपन हार्ट सर्जरी से ही ठीक होती हैं और कुछ को पैर की नस के रास्ते बिना चीरा लगाये भी ऑपरेट किया जाता है।

10. क्या जन्मजात हृदय विकार वाले मरीज संतान प्राप्त कर सकते हैं?
– ज्यादातर जन्मजात हृदय विकार वाले मरीज की सफल प्रेग्रेंसी संभव है। लेकिन उनके गर्भवस्था में कुछ खतरें हो सकते है, जिनकी जानकारी उन्हें प्रेगेंसी से पहले या प्रेगेंसी के दौरान जितनी जल्दी हो सके प्राप्त कर लेनी चाहिए। मरीज को कार्डियालॉजिस्ट से रिस्क के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही प्रेग्रेंसी की योजना बनानी चाहिए।

11. क्या जन्मजात हृदय विकार का इलाज बहुत महंगा होता है?

– जन्मजात हृदय विकार का इलाज इसकी गंभीरता, मरीज की उम्र और इलाज में काम आने वाले संसाधनों पर निर्भर करता है। अलग-अलग केसों का अलग इलाज और खर्चा होता है। आजकल कई प्रकार की सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थाऐं इस बीमारी के ईलाज के लिए आर्थिक मदद भी करती है।

डॉ. प्रशांत महावर | कंसलटेंट – पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी | नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर

Narayana Health

Share
Published by
Narayana Health

Recent Posts

WORLD ASTHMA DAY 2021: Uncovering Asthma Misconceptions

Time when the entire world is struggling even to breathe, asthma patients challenges are unimaginable,…

2 days ago

बीमारियों पर कोविड संक्रमण का असर, कोविड वैक्सीन कितनी कारगर?

कोविड महामारी का दौर एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहा है। देश के बहुत…

6 days ago

Suicidal thoughts: How to deal with them?

Having suicidal thoughts is not uncommon. These kinds of negative thoughts occur to a majority…

1 week ago

Oral cancer: prevention and treatment

What is oral cancer Oral cancer or mouth cancer include cancer of lip, tongue, area…

1 week ago

Biopsy

What is a biopsy? A biopsy is a procedure in which we take the sample…

1 week ago

Bone sarcoma

Bone is mesenchymal tissue (dense connective tissue). Cancer in bone could be primary and secondary.…

1 week ago