Categories: Hepatology

भारत में हर 5 में से 1 व्यक्ति फैटी लिवर से प्रभावित है |

फैटी लिवर एक मेडिकल कंडीशन है जिसमें लिवर में फैट जिसे हम हिंदी में वसा या चर्बी कहते हैं का जमाव हो जाता है। इसका कारण हैं शराब का सेवन, अनावश्यक दवाइयों का सेवन, कुछ तरह के वायरस इनफेक्शन जैसे हेपेटाइटिस सी। परंतु आज के दौर में इसका प्रमुख कारण हमारी अनियंत्रित लाइफस्टाइल और इससे जुड़ी बीमारियां है। लिवर में फैट जमा होने की संभावना उन लोगों में ज्यादा होती है जिन्हें मोटापा, डायबिटीज या उनके ब्लड में कोलेस्ट्रॉल यानी फैट की मात्रा ज्यादा हो। ऐसे लोगों में लिवर में फैट जमने की संभावना लगभग 60% होती है। इस तरह के व्यक्तियों में लिवर में फैट जमा होने को हम नॉन अल्कोहोलिक फैटी लीवर डिजीज (NAFLD) कहते हैं। इसके विपरीत शराब से होने वाले फैटी लिवर को हम एल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज कहते हैं।

क्या फैटी लिवर हमारे शरीर को नुकसान पहुंचाता है?
अच्छी बात यह है कि अधिकतम लोगों में जिन्हें फैटी लीवर है उन्हें कभी भी कोई शारीरिक हानि नहीं होती। परंतु 15 से 20 % लोगों में यह चर्बी लिवर की कोशिकाओं (Cells) में सूजन या इन्फ्लेमेशन कर सकती है। इस अवस्था को हम नॉन एल्कोहलिक स्टीटोहेपिटाइटिस (NASH) कहते हैं।
जैसा कि मैंने बताया कि लिवर में सिर्फ चर्बी जमा होने से जिसे हम simple steatosis कहते हैं से कोई नुकसान नहीं होता परंतु अगर NASH की स्थिति है तो फिर यह बीमारी कुछ लोगों में धीमी गति से बढ़ सकती है। NASH के मरीजों में यह देखा गया है कि धीरे-धीरे लिवर में स्कार टिशु (scar tissue) यानी रेशे (fibrosis) पड़ने लगते हैं और  करीब 1% फैटी लीवर के मरीजों में 15 से 20 सालों में लिवर खराब होकर फेल भी हो सकता है और लिवर ट्रांसप्लांट की नौबत तक आ सकती है। इसलिए फैटी लिवर के मरीजों में यह जरूरी है कि वें पता लगाएं कि लिवर में सिर्फ फैट (simple steatosis) है या NASH की अवस्था है।

फैटी लीवर की डायनोसिस कैसे होती है?
आजकल हेल्थ चेकअप या संपर्णू बॉडी चेक मैं या किसी अन्य कारण से लोग सोनोग्राफी कराते हैं तो फैटी लिवर का पता चल जाता है। NASH और लिवर में scarring की अवस्था जानने के लिए हम कुछ टेस्ट कराते हैं जैसे ब्लड में लिवर फंक्शन टेस्ट और एक विशेष प्रकार की सोनोग्राफी जैसी ही जाँच जिसे हम फाइब्रोस्कैन कहते हैं। साथ ही साथ हम यह भी देखते हैं कि लिवर में चर्बी जमा होने का कोई अन्य कारण तो नहीं है जैसे की, शराब का सेवन या हेपेटाइटिस सी वायरस का इन्फेक्शन। फिर भी अगर हम NASH की डायग्नोसिस नहीं कर पा रहे हैं तो कुछ लोगों में लिवर बायोप्सी जांच भी करानी पड़ सकती है।

फैटी लिवर के लक्षण
महत्वपूर्ण बात यह है कि फैटी लिवर के कोई लक्षण होते ही नहीं हैं। हां यह जरूर है कि कुछ लोगों में पेट के राइट साइड के ऊपरी भाग में जहां लिवर होता है वहां कुछ खिंचाव सा जरूर महसूस होता है।

फैटी लिवर का उपचार
अब हमें पता है की फैटी लिवर अनियंत्रित लाइफस्टाइल और शराब का सेवन करने से होता है। इसलिए इसका प्रमुख इलाज यही है कि हम अनियंत्रित लाइफस्टाइल को बदले और शराब का सेवन ना करें। अगर मोटापा है तो मोटापे को कम करें, 30 मिनट तेजी से रोज घूमे, अधिक तेल और मीठे से परहेज करें। यह देखा गया है कि वजन को 5 से 10% कम करने से NASH की अवस्था और लिवर में हो चुकी scarring भी ठीक हो सकती है। इसके अलावा कुछ दवाइयां भी हैं जो थोड़ी बहुत कारगर होती हैं जिनका सेवन डॉक्टर की सलाह से किया जा सकता है।

प्रोफेसर (डॉ.) राहुल राय, कंसलटेंट – लिवर रोग एवं लिवर ट्रांसप्लांट फिजीशियन, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर

Narayana Health

Recent Posts

सर्वाइकल कैंसर या बच्चेदानी के मुंह का कैंसर

बच्चेदानी के मुंह का कैंसर महिलाओं में होने वाले कैंसर में दूसरे स्थान पर आता…

2 weeks ago

Cervical Cancer Screening

Regular cervical screening can prevent about seven or eight out of every 10 cervical cancers…

2 weeks ago

Amyotrophic lateral sclerosis: All you need to know

Amyotrophic lateral sclerosis Table of Content: What is amyotrophic lateral sclerosis? Who gets ALS? What…

3 weeks ago

Brain Angiogram: Why Is It Done?

Brain angiogram, also known as a cerebral angiogram, is one of the common diagnostic tests…

3 weeks ago

All you need to know about Ataxia

Table of Content: What is Ataxia? Causes Symptoms Risk Factors & Complications How is it…

3 weeks ago

पोस्ट कोविड सिंड्रोम में तेजी से बढ़ रही पल्मोनरी फाइब्रोसिस और एम्बोलिज्म (खून के थक्के) की समस्या

जयपुर। कोरोना संक्रमण से ठीक होने के बाद भी फेफड़ों पर इसका असर लंबे समय…

3 weeks ago