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पेट की गांठ के पीछे के कारण क्या होते हैं? जानिए लक्षण और इससे बचने के उपाय

पेट की गांठ को पेट का कैंसर या स्टमक कैंसर भी कहा जाता है। इस स्थिति में पेट में उभार आ जाता है या फिर पेट में सूजन आ जाती है, ये गांठ के शुरुआती लक्षण होते हैं। इसकी वजह से पेट की गांठ से प्रभावित होने वाला हिस्सा बाहर निकला हुआ दिखता है। पेठ की गांठ के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इसमें लिपोमा, हर्निया और हीमेटोमा जैसी परेशानियां शामिल हैं। पेट की गांठ दो तरह की होती है, यह नरम भी हो सकती है और कठोर भी हो सकती है। कुछ लोगों को इसकी वजह से दर्द होता है। जबकि कुछ को पेट में गांठ जैसे लक्षण ही दिखाई नहीं देते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि कारणों के आधार पर ही पेट की गांठ के लक्षण नजर आते हैं। अगर किसी को हर्निया की शिकायत है  और उसी की वजह से पेट में गांठ है, तो गांठ के भीतर दर्द महसूस हो सकता है। अगर ऐसा लिपोमा की वजह से है तो दर्द कम महसूस होता है। इसके अलावा बीमारी में कई दूसरे लक्षण भी दिखाई देते हैं। अगर किसी को पेट में गांठ है, तो उसे कब्ज हो सकती है, वजन कम हो सकता है या फिर मल से खून आने जैसे लक्षण दिख सकते हैं।

पेट में गांठ के लक्षण क्या होते हैं?

तो चलिए अब पेट के कैंसर के लक्षणों के बारे में जान लेते हैं-

  • पेट में दर्द होना
  • पेट का फूल जाना
  • गांठ के आसपास जलन होना
  • भूख में बदलाव होना
  • जी मिचलाना
  • उल्टी होना
  • छाती में दर्द होना
  • कब्ज होना
  • मल त्यागने में परेशानी होना
  • पेट में दबाव जैसा महसूस होना
  • वजन उठाने में दर्द होना
  • पेशाब बहुत कम आना
  • या फिर बहुत ज्यादा पेशाब आना
  • पीलिया होना
  • बुखार आ जाना

इन सभी लक्षणों के दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए (stomach cancer symptoms in Hindi)। ताकि वक्त रहते मरीज ठीक हो सके। पेट के कैंसर के लक्षणों और पेट के कैंसर के संकेत बहुत बार दिखते ही नहीं हैं, जबकि कुछ मामलों में ऐसा भी होता है, जब मरीज को खुद में ये लक्षण दिखते हैं, लेकिन वो इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं।

पेट में ट्यूमर कैसे होता है?

पेट में गांठ के पीछे कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। तो चलिए अब इस बारे में जान लेते हैं।

हर्निया- अगर गांठ पेट के ऊपरी हिस्से पर होती है, तो मरीज को हर्निया की शिकायत हो सकती है।

पित्त में पथरी- पित्ताशय की पथरी की वजह से भी पेट में गांठ हो सकती है। पथरी की वजह से पित्त की थैली बाहर आने लगती है। इसी वजह से गांठ दिखाई देने लगती है।

हिमोमोटा- इसकी वजह से भी पेट की गांठ की शिकायत हो सकती है। इस स्थिति में त्वचा के अंदरुनी हिस्से पर रक्त एकत्रित होने लगता है। इस वजह से खून की वाहिनिंया टूटने लगती हैं। इससे भी गांठ जैसा उभार महसूस हो सकता है।

लिपोमा- पेट में चर्बी के कारण होने वाली गांठ को लिपोमा कहते हैं। जब पेट में अधिक चर्बी जम जाती है, तो वो गांठ का रूप ले लेती है। इसे ही कुछ लोग गलती से कैंसर तक समझ लेते हैं। जबकि लिपोमा कैंसर पेट का कैंसर नहीं होता है। ऐसा भी कहा जाता है कि लिवर बढ़ने की वजह से पेट में गांठ की समस्या हो सकती है।

कैंसर- ये भी पेट की गांठ की वजह हो सकता है। इसमें कोलन, लिवर, किडनी और आंत के कैंसर को शामिल कर सकते हैं।

क्रोन- यह इन्फ्लमेटरी बाउज बीमारी भी कहलाती है, जिसके कारण पाचन तंत्र की परत पर सूजन होने लगती है। इसकी वजह से पेट का उभार आ जाता है। इसके इलावा कुछ अन्य बीमारियों जैसे अंडाश्य में फोड़ा होने के कारण भी पेट में गांठ हो सकती है।

क्या अल्सर से कैंसर हो सकता है?

अल्सर से कैंसर होने की आशंका बहुत कम होती है। जानकारी के मुताबिक जितनी भी आशंका होती है, वह गैस्ट्रिक अल्सर के कारण होती है। कभी-कभी तो ऐसा लगता है कि कैंसर के कारण अल्सर उत्पन्न होता है।

पेट के कैंसर के उपचार क्या हैं?

ऑपरेशन- अब पेट का कैंसर के उपचार के बारे में जान लेते हैं। जब भी हार्निया, कैंसर या फिर आंतों में किसी तरह दिक्कत हो तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर ऑपरेशन कराने की सलाह दे सकते हैं। जिसमें लेप्रोस्कोपी नाम की सर्जिकल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है।

कीमोथेरेपी- इससे गांठ के आकार को कम किया जाता है। जब गांठ का आकार छोटा हो जाता है, तो कीमोथेरेपी को बंद कर दिया जाता है। ऐसा करने के बाद फिर गांठ को ऑपरेशन के जरिए शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

पेट में ट्यूमर का ऑपरेशन? 

पेट में ट्यूमर को निकालने के लिए पेट में ट्यूमर का ऑपरेशन भी किया जाता है। इस प्रक्रिया को बेहद जटिल माना जाता है। लेकिन इसमें सर्जरी करने के अलावा और दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है। इस मामले में डॉक्टर अकसर सर्जरी कराने की सलाह ही देते हैं। सर्जरी भी कोई मामूली नहीं होती बल्कि ये भी जानलेवा हो सकती है। इसलिए मरीज को पहले ही मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार कर दिया जाता है। उसे आश्वस्त किया जाता है और भरोसा दिलाया जाता है कि सबकुछ ठीक हो जाएगा। ट्यूमर के आकार के हिसाब से डॉक्टरों की टीम तैयार की जाती है। जिसमें अलग-अलग विभाग के डॉक्टरों को शामिल किया जाता है।

पेट के कैंसर के पीछे कई वजह होती हैं। इसलिए इससे बचाव के लिए शुरुआती संकेतों और पेट का कैंसर का लक्षण के बारे में पता होना चाहिए। जिसके बाद डॉक्टर से सलाह ली जाती है। अगर शुरुआत में ही बीमारी का पता चल जाए, तो उसे दवाओं से ठीक किया जा सकता है, लेकिन अगर देर हो जाए और बाद में पता चले, तो ऑपरेशन करवाना पड़ सकता है। ये ऑपरेशन भी आसान नहीं होता बल्कि जानलेवा साबित भी होता है।

Dr. Kaushal Yadav | Senior Consultant & Clinical Lead Oncology, Surgical Oncology | Narayana Superspeciality Hospital, Gurugram

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