Categories: Orthopaedics

दूरबीन से बिना चीर-फाड़ के, टूटा एंकल लिगामेंट हो सकता है ठीक

जयपुर। धीरज (35) चलते-चलते अचानक ऊबड़-खाबड़ सड़क पर एक गड्ढे में गिर गया। पांव के अचानक मुड़ने से उसके टखने (एंकल) का ए.टी.एफ.एल. लिगामेंट (एंटेरिअर टेलोफाइबूलर लिगामेंट) पूरी तरह टूट गया। लापरवाही के कारण जब टखने में दर्द और सूजन लगातार बढ़ती चली गई और दर्द असहनीय हो गया, तब वह डॉक्टर के पास गया। आर्थ्रोस्कोपी तकनीक द्वारा (दूरबीन के माध्यम से) टूटी हुई लिगामेंट रिकंस्ट्रक्ट की गई और धीरज अब पूरी तरह ठीक है। धीरज की तरह ही आए दिन ऐसे मामले सामने आते है, जिन्हें पांव के मुड़ने से या खेलते समय ऐड़ी मुड़ने के कारण लिगामेंट इंजरी हो जाती है। ध्यान नहीं देने पर ऐसी समस्या गंभीर भी हो सकती है।

लिगामेंट इंजरी की समस्या प्राय –

चलते-चलते अचानक पैर मुड़ने से या खेलते वक्त ऐड़ी मुड़ने से होती है। एंकल में चोट खासतौर पर खिलाड़ियों में ज्यादा देखी जाती है, मगर यह समस्या किसी भी उम्र में ऐड़ी मुड़ने पर हो सकती है। ऐड़ी मुड़ने के आम कारण है – सही साइज के जूते नहीं पहनना,  ऊंचे-नीचे रास्तों पर चलना, ऊंची हिल की सैंडिल पहनना आदि।

लिगामेंट इंजरी से होती है चलने में समस्यां –

एंकल स्प्रेन (लिगामेंट चोट) के कारण दर्द के साथ सूजन हो जाती है। अक्सर इसके इलाज में लापरवाही करने से दर्द एवं सूजन बढ़ती चली जाती है और मरीज का चलना भी मुश्किल हो जाता है। समय रहते उपचार नहीं लेने पर भविष्य में जोड़ खराब भी हो सकते है।

लिगामेंट चोट के अनुसार इलाज –

एंकल इंजरी का दवाईयों, बर्फ की सेक एवं बैंडेज/प्लास्टर द्वारा इसका इलाज संभव है। किन्तु गंभीर मामलों में जब ऐड़ी की ए.टी.एल.एफ. लिगामेंट पूरी तरह टूट जाती है तब सर्जरी की आवश्यकता पड़ती है। उन्होंने बताया कि अब नई तकनीकों से बड़ा चीरा लगाए बिना ही, आर्थ्रोस्कोपी तकनीक से मामूली चीरे के जरिए इसकी सर्जरी संभव है। हालांकि अभी टखने के लिगामेंट की सर्जरी में आर्थ्रोस्कोपी तकनीक देश के कम ही सेन्टर्स पर उपलब्ध हो पा रही है। टखने की दूरबीन द्वारा सजरी, आर्थ्रोस्कोपी के क्षेत्र में एक नया उपचार विकल्प है जो अब कई समस्याओं में जैसे-एडी का गंभीर दर्द, एडी में इंफेक्शन एवं जोड़ को जाम करने जैसे मामलों में प्रयोग में ली जा रही है। इस तकनीक द्वारा उपचार से सामान्य मरीज अगले दिन ही अपने काम पर लौट सकता है। वहीं खिलाड़ी 4 से 6 हफ्ते में फिर से खेलने जा सकता है।

डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल, ओर्थपेडीकज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन, नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर

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