Categories: Gynaecology

दिल्ली एनसीआर के वायु प्रदूषण से अजन्मे बच्चों की रक्षा

भारत नवजात मृत्यु (neonatal deaths) दर शीर्ष रैंक रखता है जो कि हमारी स्वास्थ्य स्थिति को भी इंगित करता है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि जहरीली हवा इसके प्रमुख कारणों में से एक है। वर्ष 2016 में लगभग 101788 बच्चों की वायु विषाक्तता के कारण समय से पहले मौत हो गई। बहुत सारे बच्चे वायु प्रदूषण के कारण लम्बे समय तक बीमार रहते हैं। राष्ट्रीय राजधानी का उल्लेख यहाँ नहीं भूलना चाहिए  जहाँ AQI खतरनाक स्तर पर बना रहता है।

इस वायु प्रदूषण से सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाएं और उनके भ्रूण (fetus) को है। अनगिनत अध्ययनों से पता चलता है कि गर्भवती महिलाओं के जहरीले वायु के संपर्क में आने से गर्भपात हो सकता है, स्टिल बर्थ, समय से पहले प्रसव, कम वजन के बच्चे पैदा हो सकते हैं। नवजात मृत्यु दर और वायु विषाक्तता के बीच मजबूत संबंध कई बार स्थापित किया गया है। एलर्जी और वायु प्रदूषण के लिए एक अनियंत्रित जोखिम अंतर्गर्भाशयी सूजन (intrauterine inflammation) का कारण हो सकता है। इससे निम्न समस्याएं हो सकती है –

  • मस्तिष्क और न्यूरोलॉजिकल विकास को प्रभावित करना
  • फेफड़े के गठन और कार्यों को प्रभावित करना
  • कैंसर तक हो सकता है
  • मोटापा
  • ध्यान का कमजोर होना
  • कम बुद्धि
  • अल्जाइमर रोग

निदान (पैथोलॉजी):

प्रसव से 2-3 सप्ताह पहले भ्रूण (Fetal) फेफड़े ज्यादातर तीसरी तिमाही के अंत में पूरी तरह से विकसित होते हैं। एलर्जी से भरी जहरीली हवा के संपर्क में आने पर ऐसे अपरिपक्व फेफड़े के टिश्यू न केवल दोषपूर्ण फेफड़े का निर्माण कर सकते हैं, बल्कि अपनी पूर्ण कार्यक्षमता को भी नहीं प्राप्त कर सकती। इस तरह के बच्चे दमा या सीओपीडी के मरीज होते हैं।

अध्ययनों में पाया गया है कि बच्चों के प्रदुषण के संपर्क में आने और जन्मपूर्व कैंसर के बीच मजबूत संबंध है, जो कैंसर फ़ैलाने वाले प्रदुषण के संपर्क में हैं, जैसे विशेष रूप से डीजल कण उत्सर्जन और यातायात निकास प्रदूषकों का कारण बनते हैं। इससे  फेफड़ों के कैंसर से लेकर ल्यूकेमिया तक का खतरा होता है। कुछ देर से होने वाले खतरों में हृदय प्रणाली से जुड़े हो सकते है।

क्या इन्हें रोका जा सकता है?

हाँ। चीन में सख्त वायु प्रदूषण नियम (pollution regulation) लागु करने के बाद और पहले किए गए अध्ययनों से पता चला है कि प्रदूषण और विषाक्त पदार्थों को हटाए जाने के बाद रुझान उलट गए थे और फिर हवा को साफ करने के उपाय किए गए थे।

गर्भवती महिलाओं के लिए सुरक्षा दिशानिर्देश हैं –

  1. बाहर कम से कम जाएं यदि संभव हो तो पीक ट्रैफिक से बचें। इस उद्देश्य के लिए सीटी मास्क या N95 मास्क का उपयोग करके अपनी नाक और मुंह को ढंकने का प्रयास करें। वे सभी प्रमुख वेबसाइटों पर आसानी से ऑनलाइन उपलब्ध हैं।
  2. घर के अंदर का प्रबंध – वायु की आर्द्रता आदर्श रूप से 40% होनी चाहिए। आप हवा की शुद्धता को बनाए रखने के लिए गर्भावस्था के दौरान एयर ह्यूमिडिफायर / प्यूरीफायर किराए पर ले सकते हैं या खरीद सकते हैं। या आप वायु शुद्ध करने वाले पौधे खरीद सकते हैं और उन्हें घर के सभी कोनों में रख सकते हैं। वे खरीदने के लिए कम कीमत के हैं और कार्य करने के लिए किसी भी बिजली की आवश्यकता नहीं है। वे आपके अपने 24 घंटे के ऑक्सीजन उत्सर्जक हैं। इसके अलावा घर साफ रखें।
  3. अत्यधिक परिश्रम से बचें – अपनी शारीरिक गतिविधियों को सीमित करें। भारी कार्डियो और गर्भावस्था योग या श्वास व्यायाम, प्राणायाम, तितलियों, बॉल असिस्टेड स्क्वेट्स आदि से बचें।
  4. बच्चे की प्लानिंग से पहले हीं धूम्रपान छोड़ें – सेकन्डेरी स्मोकिंग से भी बचें। धुआं टार और अन्य जहरीले रसायनों से भरा होता है जो फेफड़ों में भारी जलन पैदा कर सकता है जिससे सांस लेने में तकलीफ हो सकता है। एक बार जब वे नाल (placenta) में प्रवेश करते हैं तो भ्रूण (fetus) में फेफड़े का विकास धीमा हो सकता है।
  5. भाप और नमक मिला गर्म पानी से गले को साफ करने के लिए गार्गल करें।
  6. अपनी आँखों को दिन में 3-4 बार या आवश्यकतानुसार ठंडे पानी के छीटें से धोएं। आराम की मुद्राएँ और ध्यान की कोशिश करें। अच्छी नींद लें।
  7. अपने आहार में बहुत सारा विटामिन सी शामिल करें। यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है और एलर्जी से बचाने में मदद करता है। गुड़ और शहद का सेवन करने से भी समान लाभ होता है।
  8. संभव एलर्जी के लिए अपनी गैस या स्टोव की जांच करवाएं।
  9. डिस्पेनिया दवाओं के साथ एक एलर्जी किट तैयार रखें (काउंटर मेडिसिन सेवन करने से पहले अपने चिकित्सक या स्त्री रोग विशेषज्ञ से परामर्श करें) इनहेलर्स, नेब्युलाइजर्स और अपने गाइनी के संपर्क विवरण रखें ।
  10. हाइड्रेटेड रहें – पानी, सब्जी सूप लेते रहें। सभी पेय पदार्थों का सेवन कमरे के तापमान पर करें। नारंगी, दलिया, कैंटालूप, सेलरी, स्ट्रॉबेरी और दही जैसे तरल पदार्थ खाने में शामिल करें। यह आपके दैनिक पोषण में पानी की मात्रा सुनिश्चित करने में सहायक हैं।
  11. अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ से मिलें यदि ये लक्षण नहीं जाते –
  • अत्यधिक अनियंत्रित खांसी
  • सांस लेने में तकलीफ दिन में 3 बार से अधिक होती है, इनहेलर्स से भी फर्क नहीं पड़ता
  • स्टेटस दमा
  • अत्यधिक थकान
  • पेट की परेशानी या दर्द
  • असहनीय सिरदर्द
  • जी मिचलाना
  • 7-8 घंटे (केवल 28 सप्ताह के बाद) से अधिक भ्रूण (fetal) की हलचल महसूस नहीं होता

भ्रूण (fetal) के विकास में माँ के स्वास्थ्य के महत्व को समझें। आपका भ्रूण आपके साथ खाता है, आपके साथ सोता है और आप जो भी सांस ले रहे हैं वह वही सांस लेता है। आपका परिवार यह सुनिश्चित करता है कि आप सही भोजन करें और सोएँ, इस क्षण को संभालें, और सुनिश्चित करें कि आप सही सांस लें।

डॉ. प्रियंका जैन, कंसलटेंट – पेडियाट्रिक्स, धर्मशीला नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

Narayana Health

Recent Posts

HIP DYSPLASIA – How can parents help to protect their Child’s Hips

A diagnosis of hip dysplasia is a harrowing time for parents, hip dysplasia occurs when…

12 hours ago

Persisting Symptoms even after testing COVID Negative? Get Screened!

India’s COVID 19 recovery rates are amongst the highest in the world due to the…

2 days ago

कोरोना से ठीक होने के बाद भी सामने आ रहे तंत्रिका तंत्र संबंधित बीमारियों के मामले

कोरोना से ठीक होने के बाद भी सामने आ रहे तंत्रिका तंत्र संबंधित बीमारियों के…

2 days ago

सिर्फ कोविड नेगेटिव नहीं, कोविड से पूर्ण रिकवरी हैं महत्वपूर्ण!

सिर्फ कोविड नेगेटिव नहीं, कोविड से पूर्ण रिकवरी हैं महत्वपूर्ण! हमारे फ्रंटलाइन कोरोना वॉरियर्स और…

4 days ago

World COPD day

COPD is a long-standing condition affecting the airways and the lungs. Global Initiative for Chronic…

6 days ago

Air Pollution and COPD

Delhi finds hard to breathe as the AQI continues to worsen Every year this time…

6 days ago