Categories: Narayanahealth

डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट- अंतिम चरण के गुर्दा रोग में मरीज के लिए सर्वश्रेष्ठ विकल्प क्या है?

अंतिम चरण का गुर्दा रोग, एक ऐसी स्थिति है जहां गुर्दे अपरिवर्तनीय रूप से खराब हो जाते हैं और अपनी सामान्य क्षमता की अपेक्षा सिर्फ 10 से 15 प्रतिशत कार्यक्षमता से कार्य कर पाते हैं। अंतिम चरण में मरीज को जिंदा रखने के लिए रीनल रिप्लेसमेंट थैरेपी (डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट) की आवश्यकता होती है।
अधिकांश मरीज के लिए किडनी ट्रांसप्लांट कारगर
किडनी ट्रांसप्लांट, अंतिम चरण के किडनी फेलियर वाले अधिकांश मरीजों के लिए सबसे अच्छा विकल्प है, खासतौर पर युवा मरीजों के लिए। यदि मरीज की उम्र ज्यादा न हो, गंभीर हृदय रोग न हो, मानसिक बीमारी न हो या अन्य कोई गंभीर बीमारी न हो तो अधिकांश मरीज अंतिम चरण के किडनी फेलियर में ट्रांसप्लांट करा सकते हैं।
किडनी दान के बाद भी जी सकते हैं सामान्य जीवन
अगर सर्जरी की योजना सही तरह से बनाई जायें तो किडनी ट्रांसप्लांट – मरीज और किडनी डोनर, दोनों के लिए सुरक्षित ऑपरेशन है। ऑपरेशन के बाद किडनी डोनर का जीवन भी सामान्य रहता है। मरीज को उसके रिश्तेदार, जीवनसाथी, दोस्त या ऐसा व्यक्ति जो ब्रेन डेड हो (कैडेवर डोनर), किडनी दे सकता है। आमतौर पर लोगों में यह धारणा रहती है कि किडनी दान करने के बाद उनका जीवन प्रभावित हो जायेगा, लेकिन जीवित रहने के लिए सिर्फ एक ही किडनी काफी है। विभिन्न शोधों से यह साबित हो चुका है कि जिन मरीजों को जीवित डोनर से किडनी मिलती है, वे उन ट्रांसप्लांट मरीजों की तुलना में अधिक समय तक जीवित रहते हैं, जिन्हें मृतक डोनर से किडनी प्राप्त हुई हो।
किडनी ट्रांसप्लांट के बारे में कुछ तथ्य
– ट्रांसप्लांट किए गए मरीज, डायलिसिस के सहारे रहने वाले मरीजों की अपेक्षा ज्यादा समय तक जीवित रहते हैं। ट्रांसप्लांट के बाद पहले तीन महीने भले ही उन्हें इंफेक्शन का ज्यादा खतरा होता है लेकिन इसके बाद वे सामान्य जीवन व्यतीत कर सकते हैं।
-यह बात साबित की जा चुकी है कि सबसे अच्छा परिणाम उन रोगियों को प्राप्त होता है जो रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी के दौरान जल्दी से जल्दी प्रत्यारोपण कराते हैं।
किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे
जीवन की बेहतर गुणवत्ता
किडनी ट्रांसप्लांट जीवन की बेहतर गुणवत्ता प्रदान करता है क्योंकि अब आप डायलिसिस से बंधे नहीं हैं। मरीजों को काम पर लौटने, अधिक स्वतंत्र रूप से यात्रा करने और आहार व तरल पदार्थ का प्रतिबंध न्यूनतम रहता है जिससे वे एक बेहतर जीवन व्यतीत कर पाते है। इसके अलावा अधिकांश मरीजो को प्रत्यारोपण के बाद अधिक ऊर्जा महसूस होती है।
जीवन प्रत्याशा में वृद्धि –
डायलिसिस पर रहने की तुलना में प्रत्यारोपण के बाद जीवन प्रत्याशा काफी बढ़ जाती है (प्रत्यारोपण के बाद पहले 3 महीनों के दौरान को छोडक़र)।
प्रजनन क्षमता को ठीक करने में मदद करता है
गंभीर किडनी फेलियर या अंतिम चरण के गुर्दा रोग वाली महिलाओं में मासिक धर्म, प्रजनन क्षमता और यौन क्रिया में गड़बड़ी सामान्य है। आमतौर पर एक ट्रांसप्लांट के बाद प्रजनन क्षमता ठीक हो जाती है। यह महिलाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि डायलिसिस पर सफल गर्भावस्था होना बहुत दुर्लभ है।
कंसलटेंट, नेफ्रोलॉजी एंड ट्रांसप्लांट मेडिसिन
Narayana Health

Recent Posts

WORLD ASTHMA DAY 2021: Uncovering Asthma Misconceptions

Time when the entire world is struggling even to breathe, asthma patients challenges are unimaginable,…

2 days ago

बीमारियों पर कोविड संक्रमण का असर, कोविड वैक्सीन कितनी कारगर?

कोविड महामारी का दौर एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहा है। देश के बहुत…

6 days ago

Suicidal thoughts: How to deal with them?

Having suicidal thoughts is not uncommon. These kinds of negative thoughts occur to a majority…

1 week ago

Oral cancer: prevention and treatment

What is oral cancer Oral cancer or mouth cancer include cancer of lip, tongue, area…

1 week ago

Biopsy

What is a biopsy? A biopsy is a procedure in which we take the sample…

1 week ago

Bone sarcoma

Bone is mesenchymal tissue (dense connective tissue). Cancer in bone could be primary and secondary.…

1 week ago