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बीमारियों पर कोविड संक्रमण का असर, कोविड वैक्सीन कितनी कारगर?

कोविड महामारी का दौर एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहा है। देश के बहुत से शहरों में नाईट कर्फ्यू जैसी स्थिति है। लेकिन शुरुवाती दौर से अभी के दौर में फर्क यह है कि अब हमें कोविड संक्रमण से बचाव के तरीके मालूम हैं, और साथ ही वैक्सीन के लगातार अलग अलग चरण भी जारी हैं। ऐसे में बहुत धैर्य के साथ आगे बढ़ना होगा और एक दिन यह महामारी हमको छोड़कर चली जाएगी। लेकिन इसके साथ साथ अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे बहुत से लोगों में कोविड संक्रमण और वैक्सीन दोनों के लेकर सवाल हैं, जैसे कोविड का अन्य गंभीर बीमारियों पर क्या असर होता है? क्या कोविड वैक्सीन अन्य बीमारियों से जूझ रहे लोगों पर भी कारगर है या इसके मुछ नियम हैं? आदि। आइये इस विषय को व्यापकता से जानने की कोशिश करते हैं :-

सबसे पहले जानें कोविड संक्रमण और उसके अन्य बीमारियों पर प्रभाव के बारे में :-

कोविड केवल श्वसन संबंधी बीमारी नहीं :-  कोविड का अन्य बीमारियों पर क्या असर होता है यह इस बिंदु से जानना आसान हो जाएगा। जैसा कि ड्रॉपलेट इन्फेक्शन में होता है, कोविड श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है, जिसके कारण कोविड से जूझ रहे बहुत से मरीजों को गंभीर स्थिति में वेंटीलेटर और ऑक्सीजन की ज़रूरत भी पड़ जाती है,  जो कि सही तथ्य है लेकिन यहाँ यह समझने की ज़रूरत है कि कोविड संक्रमण केवल श्वसन तंत्र तक ही सीमित नहीं है बल्कि यह व्यक्ति की नसों को भी प्रभावित करता है, इम्युनिटी को प्रभावित करता है और अन्य अंगों को भी इसलिए कोविड संक्रमण के बाद व्यक्ति के अन्य बीमारियों से जूझने या पहले से रही बीमारियों के गंभीर होने के तुलनात्मक रूप से अधिक आशंका होती है। इसलिए देखा भी गया कि कोविड संक्रमण से ठीक होने के बाद बहुत से मरीजों की फेफड़ों की क्षमता पर असर पड़ा और किसी किसी को स्ट्रोक, हृदयरोग आदि भी हुए, जो संक्रमण से पहले नहीं थे। अब इस सन्दर्भ में अन्य बीमारोयों की चर्चा करते हैं :-

डायबिटीज :-  बहुत मुमकिन है कि डायबिटीज से जूझ रहे व्यक्ति की स्थिति कोविड के संक्रमण  के बाद गंभीर हो जाए, या संक्रमण का गंभीर रूप देखने को मिले। क्योंकि जैसा कि बताया गया कोविड श्वासन तंत्र के अलावा व्यक्ति की नसों और अंगों को प्रभावित करता है और रक्तचाप में थोड़ा सा भी बदलाव डायबिटीज के मरीज़ के लिए जोखिम भरा होता है। साथ ही यदि डायबिटीज के चलते किडनी की समस्या से जूझ रहे हैं तो कोविड के साथ साथ डायबिटीज के भी गंभीर होने का जोखिम है। इसलिए ऐसे मरीजों को अतिरिक्त सावधानी की ज़रूरत है।

श्वसन संबंधी बीमारी :- शवसन संबंधी किसी भी बीमारी में फेफड़ों की क्षमता अहम् होती है और रोग की गंभीरता के साथ घटने लगती है और उसे लगातार बचाने की कोशिश होती है। यदि व्यक्ति पहले से सीओपीडी, अस्थमा आदि से जूझ रहा है और साथ ही कोविड संक्रमण की भी चपेट में आगया है तो फेफड़ों की कोशिकाओं पर अतिरिक्त असर पड़ सकता है। क्योंकि कोविड खुद प्राथमिक रूप से शवासन संबंधी संक्रमण है।

कैंसर :- कैंसर की यदि बात करें तो ऐसे मरीजों की थेरेपी और रोग दोनों के कारण इम्युनिटी जोखिम में होती है जिसके कारण मरीज़ के लिए कोई छोटे से छोटा संक्रमण भी घातक सिद्ध हो सकता है, इसलिए कोविड से बचाव ज़रूरी है। क्योंकि कोविड का संक्रमण अतिरिक्त रूप से इम्युनिटी प्रभावित करेगा, रोग गंभीर होने की आशंका बनेगी और कोविड के भी गंभीर होने का जोखिम होगा।

हृदय रोग :- हृदय का संचालन फेफड़ों से सीधे तौर पर जुड़ा है ऐसे में फेफड़ों में संक्रमण ह्रदय रोग से जूझ रहे व्यक्ति के लिए अतिरिक्त जोखिम से भरा है. हालाँकि यह बात किसी भी मुख्य अंग से जुड़ी बीमारीय पर लागू होता है।

स्ट्रोक :- जैसा कि बताया गया कोविड का प्रभाव व्यक्ति की नसों को भी कमज़ोर करता है और ऐसे में स्ट्रोक के मरीजों को अतिरिक्त सतर्कता की आवश्यकता है. क्योंकि यह संक्रमण के बाद गंभीर हो सकता है।

उपरोक्त को ध्यान  में रखते हुए कोविड संक्रमण से ठीक होने के बाद भी व्यक्ति को लगातार टेस्ट करवाने की सलाह दी जाती है, कोविड का प्रभाव व्यापक होता है।

कोविड वैक्सीन और अन्य गंभीर बीमारियाँ :-

कोविड वैक्सीन की बात करें तो यह पूरी तरह से सुरक्षित है। इसे वैक्सीन के विभिन्न चरणों के अनुसार समय से लगवा लेना ही उचित है। जहां तक बात है अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों की तो उनकी बीमारी से इतर इस वैक्सीन का असर उनपर भी बहुत हद तक सुरक्षित है। हालाँकि इस सन्दर्भ में अपने सम्बंधित डॉक्टर की सलाह ज़रूर लें, और कोविड वैक्सीन सेंटर पर अपनी बीमारियों के बारे में भी जानकारी साझा ज़रूर करें। अपनी दवाओं और थेरेपी आदि के साथ नियमित रहें और कोविड संबंधी नियमों का अतिरिक्त रूप से पालन करें। वैक्सीन केंद्र पर वैक्सीन की गाइडलाइन्स के अनुसार ही जाकर लगवाएं और अपना एक वैलिड फोटो आईडी ज़रूर लेकर जाएँ।

डॉ. नवनीत सूद, कंसलटेंट – पलमोनोलॉजी, धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, दिल्ली

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