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कैंसर में पर्सनलाइज्ड थेरेपी

मानव स्वास्थ्य पर निम्नलिखित तीन कारकों का बहुत प्रभाव पड़ता है:

  • जीन
  • जीवनशैली और
  • वातावरण

प्रत्येक व्यक्ति में बीमारी के उपचार के प्रभाव को ये कारक महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं। अभी हाल के वर्षों तक सभी रोगियों पर बिना किसी वैयक्तिक भिन्नता के अधिकांश रोगों में स्टैन्डर्डाइज़्ड ट्रीटमेंट का उपयोग किया जाता था। हाल के वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में आए तकनीकी विकास के कारण अब व्यक्ति केंद्रित उपचार संभव हो सका है। पर्सनलाइज्ड मेडिसिन में रोगी के स्वास्थ्य स्थिति का प्रबंधन करने के लिए उनके मोलेक्यलैर विश्लेषण के आधार पर उनके लिए विशिष्ट दवाओं का उपयोग किया जाता है। जीनोमिक्स किसी व्यक्ति विशेष में किसी भी बीमारी के मोलेक्यलैरआधार को परिभाषित करता है। इस संबंध में प्रयोग में लाए जाने वाले कुछ पर्यायवाची शब्द हैं – प्रेसिजन, प्रिडिक्टिव, प्रिवेंटिव, पार्टिसिपेटरी और पर्सनलाइज्ड हैं।

जीनोम सीक्वेंसिंग के लाभ:

  • म्युटेशन (सिंगल या मल्टीप्ल) के अस्तित्व की खोज करते हैं
  • क्या इसका प्रभाव कम किया जा सकता है,
  • क्या बीमारी की शुरुआत को टाला जा सकता है और कैसे (पर्यावरण या जीवन शैली निर्भरता)
  • अधिकतम लाभ के लिए दवा का खुराक उपयुक्त रूप से देना

प्रीसिश़न मेडिसिन एक व्यक्ति के पर्यावरण, जीवन शैली और जेनेटिक मेकअप के आधार पर रोग का उपचार तथा उस से लड़ने का उपाय प्रदान करता है।

यह चिकित्सा इस तथ्य पर आधारित है कि हर रोगी दूसरे से अलग है इसलिए उनका कैंसर भी अलग – अलग है। रोगी के ट्यूमर से टिश्यू का एक छोटा सा नमूना लिया जाता है जिसे परीक्षण के लिए उगाया जाता है और उसके ग्रोथ का परिक्षण किया जाता है। फिर केमो ड्रग्स के परिणाम को जानने के लिए इन सेल्स पर केमो ड्रग्स का उपयोग करते हैं। परिक्षण के आधार पर चयनित सबसे प्रभावी केमो ड्रग्स को फिर उस रोगी को दिया जाता है। थेरेपी से जुड़ी सबसे अच्छी बात है। थेरेपी से जुड़ी सबसे अच्छी बात है:

  • रोगी को हिट और ट्रायल से बचाता है
  • हिट और ट्रायल में दवाओं पर आने वाले खर्च को बचाता है
  • हिट और ट्रायल के दौरान होने वाले कष्ट से बचाता है
  • उम्मीद के मुताबिक परिणाम
  • मरीज और डॉक्टर दोनों का समय बचाता है

वर्तमान में कैंसर प्रबंधन के लिए निम्नलिखित विधियों का उपयोग किया जाता है:

  • कैंसर का प्रकार
  • ट्यूमर का आकार
  • इसकी मेटास्टेसिस
  1. सर्जिकल ऑन्कोलॉजी।
  2. रेडिएशन थेरेपी – सर्जरी से पहले, उसके दौरान और बाद में इस्तेमाल किया जा सकता है। एक्स-रे या प्रोटॉन के साथ, अगर कैंसर अंग से बाहर तक फैल गया है। सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान ट्यूमर को सिकोड़ने के लिए ताकि आसानी से निकाला जा सके। पुनरावृत्ति को रोकने के लिए सर्जरी के बाद दिया जाता है।
  3. एक बाहरी मशीन से लीनियर ऐक्सेलरैटर द्वारा रेडिएशन।
  4. शरीर के अंदर रखा गया रेडिएशन – इम्प्लांटेड सीड्स के माध्यम से ब्रैकीथेरेपी।
  5. कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी एक के साथ दिया जाना – ट्यूमर के आकार और संख्या को कम करने के लिए।
  6. टार्गेटेड थेरेपी।
  7. इम्यूनोथेरेपी कैंसर से इम्यून को लड़ने में मदद करने के लिए।
  8. उपचार के दौरान कैंसर के विकास को धीमा करने के लिए हार्मोन के साथ हार्मोन थेरेपी।

प्रिसिजन मेडिसिन टार्गेटेड थेरेपी की तरह प्रत्येक रोगी के विशिष्ट आवश्यकता अनुसार विशिष्ट दवाएं देते हैं, जिनसे बेहतर परिणाम प्राप्त होता है।

प्रिसिजन मेडिसिन में उपयोग में लाए जाने वाले दवाएं अभी भी परीक्षण के अवस्था से गुजर रहे हैं। इस तरह के क्लिनिकल परीक्षण में जेनेटिक म्युटेशन के साथ वाले रोगियों को लिया जाता है, जिन पर इन दवाओं का परिक्षण किया जाता है।

प्रिसिजन मेडिसिन का दायरा:

  • बायोप्सी के माध्यम से ट्यूमर का प्रकार, स्टेज और जेनेटिक म्युटेशन के लिए परीक्षण किया जाता है
  • नमूने का डीएनए एक सीक्वेंसर (ट्यूमर प्रोफाइलिंग) पर टेस्ट किया जाता है
  • टार्गेटेड दवाओं की उपलब्धता का मिलान किया जाता है
  • यदि रोगी क्लीनिकल ट्रायल के लिए मैच करता है
  • रोगी को उपचार, परीक्षण, दुष्प्रभावों अदि के संबंध में कई तरह के सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर करना होता है

प्रेसिजन मेडिसिन की सीमाएं:

  • अध्ययन किया जाने वाला म्युटेशन वास्तव में कैंसर से संबंधित न हो
  • टार्गेटेड थेरेपी के लिए दवाओं का अभाव
  • नमूने में त्रुटि ट्यूमर पर दवा का असर उल्टा हो सकता है
  • समय के साथ ट्यूमर में बदलाव
  • पेट, लंग, स्तन आदि जैसे ट्यूमर की व्याख्या करना मुश्किल है
  • एकत्र किए गए नमूने की गुणवत्ता
  • क्लीनिकल ट्रायल के लिए योग्य रोगियों की संख्या
  • क्लीनिकल परीक्षणों की संख्या
  • डेटा के विश्लेषण के साथ सीमाएं

कैंसर जैसे-जैसे बढ़ रहा है और अपना रूप बदल रहा है ठीक वैसे ही चिकित्सा तकनीक भी बदल रहा है। अब हमारे पास तेजी से बढ़ते मेटास्टेसाइजिंग वाले ट्यूमर तथा धीमी गति से बढ़ने वाले लोकलाइज़ ट्यूमर के बीच अंतर करने के उपाय मौजूद हैं। ट्यूमर का नमूना अब आपके लार के अंश से लिया जा सकता है। कैंसर प्रबंधन के सभी पहलुओं में नए प्रतिमान जोड़े गए हैं, पीईटी पर आधारित क्लीनिकल प्रक्रियाओं से एक हीं छवि में सारे कैंसर सेल प्रकाशमान हो जाते हैं जिन्हें फिर एक कलम जैसे उपकरण के माध्यम कैंसर सेल्स का पहचान किया जाता है। निश्चित रूप से पेर्सनलिज़्ड मेडिसिन को आपतक पहुंचने में थोड़ा समय लग सकता है। यहां मुख्य बात यह है कि कैंसर का उपचार संभव है,  हां अगर पर्सनलाइज्ड  मेडिसिन आप तक नहीं पंहुचा है तो बेहतर यही होगा की आप उस तक पहुंच जाएं…

डॉ. एचएस डार्लिंग (स्क्वाड्रन लीडर),  कंसलटेंट – हेमाटो ऑन्कोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी, ऑन्कोलॉजी, नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम

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