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एट्रियल फिब्रिलेशन – लक्षण, कारण, पहचान और उपचार

एट्रियल फिब्रिलेशन को आमतौर पर अनियमित दिल की धड़कन के रूप में जाना जाता है जो रक्त के थक्के, स्ट्रोक, हार्ट फेलियर और अन्य समान हृदय जटिलताओं को जन्म दे सकता है। सामान्य रूप में यह जीवन के लिए कोई खतरा नहीं है। लेकिन ध्यान ना देने या वक़्त पर उपचार ना लेने से उपर्युक्त जटिलताओं का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए डॉक्टर से तत्काल सलाह लेना आवश्यक है। अधिकांशतः 65 वर्ष से ऊपर के लोगों में इसका खतरा अधिक पाया जाता है, हालाँकि किसी भी आयु वर्ग के लोगों को यह प्रभावित कर सकता है।

एट्रियल फिब्रिलेशन के लक्षण क्या हैं?

  • दिल का तेजी से धड़कना जैसे दिल का फड़कना
  • साँसों की कमी
  • कमजोरी
  • सहन-शक्ति का कमजोर होना
  • चक्कर आना या आँखों के सामने अँधेरा छाना
  • छाती में दर्द

एट्रियल फिब्रिलेशन के विभिन्न प्रकार क्या हैं?

  • असामयिक – कुछ मिनटों, कुछ घंटों से लेकर सप्ताह तक इसके लक्षण दिख सकता है।
  • स्थायी – इसके लक्षण निरंतर बना रहता है और सामान्य होने के लिए उपचार की आवश्यकता होती है।
  • लंबे समय तक रहना – इसके लक्षण 12 महीने से अधिक समय तक रह सकता है।
  • अस्थायी – सामान्य हृदय की लय को बहाल नहीं किया जा सकता है और हृदय गति और रक्त के थक्के को नियंत्रित करने के लिए दवा की आवश्यकता होती है।

एट्रियल फिब्रिलेशन के कारण क्या हैं?

  • अव्यवस्थित विद्युत संकेतों के कारण हृदय की दोषपूर्ण कार्यप्रणाली
  • रक्तचाप में वृद्धि
  • दिल का दौरा
  • कोरोनरी आर्टरी की बीमारी
  • असामान्य हार्ट वाल्व
  • जन्मजात हृदय दोष जैसे मिट्रल वाल्व रिगर्जेटेशन
  • एक अतिसक्रिय थायरॉयड ग्रंथि या अन्य मेटबालिक विकार
  • उत्तेजक पदार्थों के संपर्क में आना जैसे कुछ दवाओं, कैफीन, तम्बाकू या शराब
  • सिक साइनस सिंड्रोम – दिल के प्राकृतिक पेसमेकर का ढंग से काम न करना
  • फेफड़े की बीमारी
  • पहले का हार्ट सर्जरी
  • विषाणु संक्रमण
  • सर्जरी, निमोनिया या अन्य बीमारियों के कारण तनाव
  • नींद न आना

एट्रियल फैब्रिलेशन से संबंधित खतरा क्या है?

  • ऊपर के सभी
  • आयु
  • मधुमेह
  • अत्यधिक शराब का सेवन
  • मोटापा
  • AF से संबंधित पारिवारिक इतिहास

एट्रियल फिब्रिलेशन से संबंधित जटिलताएँ क्या है?

  • स्ट्रोक – खून के डिस्टर्बड रिदम के कारन खून का स्वाभाविक प्रवाह प्रभावित होता है जिससे खून दिल के ऊपरी कक्ष में जाकर जमा हो जाता है। जमे हुए रक्त से थक्के का निर्माण होता है जो मस्तिष्क में रक्त आपूर्ति करने वाली धमनी में प्रवेश कर सकता है जिससे स्ट्रोक हो सकता है।
  • हार्ट फेलर – रक्त एकत्रीकरण से दिल कमजोर हो जाता है, जिससे यह रक्त को पूरे शरीर में पहुँचा नहीं पाता है इस तरह अंततः यह हार्ट फेल होने का कारण बनता है।

एट्रियल फिब्रिलेशन को रोकने के विभिन्न उपाय क्या हैं?

  • स्वस्थ और अच्छा खाएं
  • धूम्रपान से बचें
  • शारीरिक गतिविधियों में सुधार लाएं
  • वजन बनाए रखें
  • कैफीन की अधिकता से बचें
  • शराब का सेवन सीमित करें
  • तनाव कम करें
  • काउंटर दवा लेना नियंत्रित करें (खास कर ठंड और खांसी की दवा)

एट्रियल फिब्रिलेशन का निदान कैसे करें?

  • ईसीजी – इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम लीड के माध्यम से आपकी छाती से जोड़ी जाती है।
  • होल्टर – पोर्टेबल पॉकेट ईसीजी मशीन के माध्यम से ईसीजी का लगातार निगरानी और रिकॉर्डिंग किया जाता है।
  • इवेंट रिकॉर्डर – होल्टर की तरह यह हार्ट के संकेतों को रिकॉर्ड करता है, जब कोई व्यक्ति ऊपर वर्णित लक्षणों में से किसी एक का अनुभव करते हैं, तो वह एक बटन दबाते है जो इसे रिकॉर्ड करता है जिसका उपयोग लक्षणों के समय ईसीजी का मूल्यांकन करने के लिए किया जा सकता है।
  • इकोकार्डियोग्राम – एक हाथ से पकड़े जाने वाला उपकरण जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करके आपके हार्ट का मूविंग तस्वीर बनाता है। यह संरचनात्मक हृदय रोग और रक्त के थक्कों का पता लगाने के लिए आपके गले में डाला जा सकता है।
  • तनाव परीक्षण – टीएमटी या ट्रेडमिल मिल टेस्ट दौड़ने के दौरान ईसीजी लेने के लिए।
  • चेस्ट एक्स-रे – कार्डियोमेगाली को देखने के लिए, मुख्य रूप से डिफरेन्शल डाइअग्नोसिस।
  • रक्त परीक्षण – हाइपरथायरायडिज्म जैसी मूलभूत समस्या का पता लगाने के लिए।

एट्रियल फिब्रिलेशन के लिए विभिन्न उपचार विधियां क्या हैं?

  1. कन्सर्वटिव प्रबंधन मूलभूत कारण पर निर्भर करता है:
  • इलेक्ट्रिकल कार्डियो वर्शन – हल्के सीडेटिव दवा देने के बाद, पैडल या पैच के माध्यम से बिजली का झटका दिया जाता है। जिससे आपके हृदय की विद्युत गतिविधि रुक ​​जाती है और रीसेट हो जाती है।
  • दवाओं के साथ कार्डियो वर्शन – हृदय गति की निगरानी के साथ एंटी एरिथमिक की दवा। यह ब्लड थिनिंग दवाओं के साथ-साथ पूरक है।
  • हृदय गति नियंत्रण दवाएं जैसे कैल्शियम चैनल ब्लॉकर्स, बीटा ब्लॉकर्स।
  • रक्त को पतला करने वाला उपचार।
  1. सर्जिकल प्रबंधन:
  • कैथेटर एब्लेशन – कैथेटर को पैर से हृदय तक एक टिप के साथ निर्देशित किया जाता है, जिसमें रेडियो तरंगें या ठंडा या गर्म तरंग एरिथमिया के ऊतकों को मारती हैं।
  • मेज़ प्रोसीजर – एट्रियल फिब्रिलेशन को रोकने के लिए स्केलपेल / रेडियो तरंगें या क्रायोथेरेपी।
  • एट्रियोवेंट्रिकुलर (एवी) नोड एब्लेशन – एवी नोड को खत्म करने के बाद निचले कक्षों में पेसमेकर लगाना।
  • लेफ्ट एट्रियल अपेन्डिज क्लोश़र – रक्त के थक्कों को रोकने के लिए पैर से हृदय तक कैथेटर।
  1. जीवन शैली में परिवर्तन:
  • धूम्रपान छोड़ें
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें
  • वजन कम करें
  • अपने बीपी या अन्य दवा को समय पर लें
  • शराब का सेवन सीमित करें
  1. डाइट थेरेपी:
  • फल और सब्जियां अत्यधिक मात्रा में लें
  • मांसाहार कम खाएं या ना खाएं
  • विटामिन K का सेवन कम करें

प्रो. (डॉ) विवेक चतुर्वेदी, सीन्यर कन्सल्टन्ट – कार्डियोलॉजी – अडल्ट, कार्डियोलॉजी – पीडिऐट्रिक्स, डायरेक्टर – इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी, नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम

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