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आर्थोपेडिक प्रत्यारोपण सर्जरी

आर्थोपेडिक क्षेत्र में प्रत्यारोपण सर्जरी पर आने वाला लागत आज के समय में एक अहम सवाल है। भारतीय जनसंख्या का लगभग 3% (30 करोड़) ऑस्टियोआर्थराइटिस से प्रभावित है। वर्तमान में 50 वर्ष से अधिक उम्र की 75% महिलाएं इससे प्रभावित हैं जो एक अनुमान के अनुसार 2025 तक बढ़कर 6 करोड़ तक हो जा सकता है।

एक या दोनों घुटनों का प्रत्यारोपण सर्जरी:

एक घुटने के ऑपरेशन को यूनिलैट्रल प्रत्यारोपण सर्जरी  कहते हैं वहीँ दोनों घुटनों के ऑपरेशन को बाइलैट्रल प्रत्यारोपण सर्जरी कहते हैं।

सर्जरी बनाम दवा से उपचार:

विभिन्न अध्ययनों ने प्रत्यारोपण सर्जरी के बाद मरीजों में गुणात्मक सुधार पाया है उन मरीजों के मुकाबले जो गैर-सर्जिकल उपचार अपनाते हैं। इसमें एनएसएआईडीएस (NSAIDs) और स्टेरॉयड के लंबे समय तक सेवन के अपने दुष्प्रभाव भी शामिल है।

लंबे समय तक दवा पर रहने से होने वाले मुख्य नुकसान:

  1. लिवर का खराब होना।
  2. प्रयोग के साथ शरीर दवाओं के आदि होता जाता है अतः खुराक को नियमित रूप से बढ़ाने की आवश्यकता होती है।
  3. एनएसएआईडीएस (NSAIDs) के नियमित सेवन से दिल का दौरा या स्ट्रोक हो सकता है। ये पेट के लिए सख्त हैं और इससे पेट में खून आ सकता है।
  4. कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का लंबे समय तक सेवन आंखों में ग्लूकोमा (आँखों में दबाव का बढ़ना) और मोतियाबिंद जैसे कई तरह के दुष्प्रभाव पैदा कर सकता है। ऐसे हीं ना खत्म होने वाले लिस्ट में शामिल है –
  • शरीर में फ्लूइड रिटेंशन
  • मनोदशा और व्यवहार में बदलाव
  • रक्त वसा और रक्त शर्करा का बढ़ना
  • भूख का अत्यधिक बढ़ना
  • हड्डियों और त्वचा का पतला होना

और यह सब बिना किसी सकारात्मक दीर्घकालिक उपाय के लिए है क्योंकि यह बीमारी एक ऐसे चरण में है जहां हड्डी की क्षति इतनी अधिक हो चुकी है कि इस नुस्खे से वास्तव में बहुत मदद नहीं मिल सकता है।

सर्जरी के बाद होनेवाले प्रभाव:

  1. वॉकर के सहारे उसी दिन से चलना
  2. 1 से 2 दिन अस्पताल में रहना
  3. 2 महीने का रिहैबिलिटेशन जिसमें शामिल हैं –
  • घुटना मजबूत करने वाले व्यायाम
  • गति वापस पाने की सीमा
  • किसी सहारे के साथ स्वतंत्र रूप से चलना

अधिकांश मामलों में पूर्ण व्यावसायिक और व्यक्तिगत गतिविधियों को 6 सप्ताह में  प्राप्त कर लिया जाता है।

घुटना प्रत्यारोपण की लागत प्रभावशीलता:

सामाजिक दृष्टिकोण व्यक्तिगत दृष्टिकोण
विकलांगता से मुक्त जीवन की गुणवत्ता में सुधार
रोजमर्रा के जीवन में किसी पर निर्भरता नहीं पूर्ण रूप से स्वतंत्रत
चिकित्सकीय रूप से उपचार लायक मरीजों के लिए दवा की उपलब्धता अनावश्यक दवाओं से मुक्ति: एनएसएआईडीएस (NSAIDS), स्टेरॉयड और पूरक
रोग में कमी उपरोक्त दवाओं के दुष्प्रभावों से मुक्ति जैसे अंगों का खराब होना (किडनी, कान आदि)।
सामाजिक तौर पर उपलब्धता और स्वीकार्यता अकेलेपन और अवसाद से मुक्त
व्यवसाय में अतिरिक्त सुरक्षा सुबिधाओं की आवश्यकताओं में कमी व्यवसाय में सशक्त रूप से उपस्थिति
अधिक उत्पादक जीवन अनुपस्थिति से मुक्ति

तीव्र ऑस्टियोआर्थराइटिस से ग्रसित मरीज चिकित्सकीय रूप से उपचार योग होते हैं जिन्हें दवाओं और फिजियोथेरेपी की मदद से पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। ऐसे स्थिति में जब सरकार द्वारा स्वास्थ्य योजनायें चलाई जा रही हैं, तो वास्तव में इसका लाभ उन लोगों तक पहुंचाया जा सकता है जिन्हें इसकी आवश्यकता है।

अंतिम चयन:

किसी सुविधा का चयन किसी भी प्रक्रिया का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय है। अध्ययनों से पता चलता है कि उचित अस्पताल और सर्जन तक पहुंच जाने से बिना किसी जटिलता के सफल सर्जरी की संभावना बढ़ जाती है। प्रदाता के पास पहले से ही पुनर्वास और सर्जरी के बाद के पुनर्वास की विकसित योजना होनी चाहिए जो बाद में आपके ‘अच्छे निर्णय रिपोर्ट कार्ड’ में जुड़ जाती है।

अपना निर्णय बनाने से पहले ये कुछ बातें जान लें:

  1. प्रसिद्ध अस्पताल हमेशा सही विकल्प नहीं होते
  2. सेकन्ड ओपिनियन हमेशा लाभकारी होता है
  3. अस्पताल और सर्जन द्वारा किया गया सफल सर्जरी की संख्या का अनुभव हमेशा मायने रखता है।
  4. हमेशा अस्पताल के इन आंकड़ों की जांच करें
  5. सर्जिकल संक्रमण का विवरण
  6. रोगी का दुवारा पंजीकरण का विवरण
  7. सर्जरी के दौरान मृत्यु

चलो अपने लिए सबसे सही विकल्प चुनें।

डॉ. राजेश वर्मा, डायरेक्टर और सीनियर कंसलटेंट – ऑर्थोपेडिक्स, स्पाइन सर्जरी, नारायणा सुपरस्पेशलिटी हॉस्पिटल, गुरुग्राम

Narayana Health

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